उत्तराखंड में हाल ही में हुए निवेश महोत्सव के बाद सियासी गलियारों में एक नया मोड़ देखने को मिला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सोमवार को किए गए सोशल मीडिया पोस्ट ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की खुलकर तारीफ की, जिसे राजनीतिक विश्लेषक केवल एक औपचारिक बयान नहीं, बल्कि 2027 की सियासी बिसात की झलक मान रहे हैं।

निवेश महोत्सव के मंच से दिखी ‘धामी-शाह’ केमिस्ट्री

शनिवार को रुद्रपुर में आयोजित निवेश उत्सव में जब अमित शाह मंच पर थे, तभी से दोनों नेताओं की कैमिस्ट्री चर्चा का विषय बनी हुई थी। एक लाख करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर लाने को लेकर गृह मंत्री ने जिस गर्मजोशी से मुख्यमंत्री धामी की पीठ थपथपाई, उसने कई सियासी संकेत दे दिए थे। उस समय तो इसे एक मंचीय शिष्टाचार माना गया, लेकिन दो दिन बाद सोशल मीडिया पर आई पोस्ट ने समीकरणों को और पक्का कर दिया।

फेसबुक पोस्ट ने बढ़ाया धड़कनों का दबाव

सोमवार को अमित शाह ने फेसबुक पर एक पोस्ट डालते हुए लिखा, “मैदानी राज्यों की तुलना में पहाड़ी राज्य में निवेश लाना पहाड़ चढ़ने जैसा कठिन होता है, लेकिन उत्तराखंड में एक लाख करोड़ से अधिक का निवेश आना परंपरागत कल्पनाओं को तोड़ता है।” उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड की जनता का सच्चा प्रतिनिधि बताते हुए साधुवाद दिया। इस बयान ने न सिर्फ धामी के कद को बढ़ाया, बल्कि बीजेपी के अंदर के समीकरणों में भी हलचल ला दी।

सियासी संदेश: सिर्फ मोदी नहीं, अब शाह भी धामी के साथ

अब तक माना जाता था कि पुष्कर सिंह धामी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी हैं, लेकिन शाह की ये पोस्ट यह इशारा कर रही है कि अब धामी ‘शाह फलक’ पर भी चमकने लगे हैं। इससे उन नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है जो खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार मानते रहे हैं। खासकर पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और भविष्य के नेतृत्व को लेकर उठते सवालों के बीच ये पोस्ट एक तरह से धामी के समर्थन में सीधा और सशक्त संदेश माना जा रहा है।

भविष्य के लिए बढ़ी उम्मीदें, विपक्ष भी सतर्क

जहां एक ओर यह पोस्ट धामी के लिए हाईकमान की मुहर जैसी देखी जा रही है, वहीं विपक्षी खेमे में भी इसके मायने निकाले जा रहे हैं। सत्तारूढ़ दल में सीएम पद को लेकर किसी प्रकार का असमंजस न रहे, इसका संकेत शायद अमित शाह ने समय रहते ही दे दिया है। धामी समर्थकों में जोश है तो विरोधी खेमा अब नए सिरे से रणनीति पर विचार कर रहा है।