उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सख्त रुख एक बार फिर सामने आया है। हरिद्वार नगर निगम जमीन घोटाले के मामले में सीएम धामी ने बड़ा और सख्त एक्शन लिया है। इस पूरे मामले में घोटाले के आरोपी पूर्व नगर आयुक्त IAS वरुण चौधरी को बर्खास्त करने की सिफारिश की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं।
वरुण चौधरी के अलावा इस मामले में कई अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिरी है। तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट करमेंद्र सिंह के खिलाफ भी बड़ी सजा वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के तहत करमेंद्र सिंह का पद घटाया जा सकता है। साथ ही उन्हें नौकरी से बर्खास्त भी किया जा सकता है, ऐसी संभावना बनी हुई है। वरुण चौधरी और करमेंद्र सिंह दोनों ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी हैं। इसलिए सेवा नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई के लिए सभी सिफारिशें कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजी जा रही हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
हरिद्वार के तत्कालीन SDM अजयवीर सिंह पर भी एक्शन
इस घोटाले में हरिद्वार के तत्कालीन SDM अजयवीर सिंह पर भी कार्रवाई हुई है। उनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की गई है। इसके साथ ही उनके तीन सालाना इंक्रीमेंट भी रोक दिए गए हैं। यह पूरा मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा कचरा डंपिंग यार्ड के लिए ज़मीन खरीदने से जुड़ा हुआ है। यह खरीद-फरोख्त नियमों के विपरीत की गई थी, जिसके चलते सरकार को भारी नुकसान हुआ है।
मामले की जांच में बड़ा खुलासा
जांच में क्या सामने आया है, यह भी जान लेना जरूरी है। दरअसल, इस मामले की गहन जांच में यह बात सामने आई है कि अधिकारियों ने कथित तौर पर लगभग ₹15 करोड़ की कीमत वाली 2.3070 हेक्टेयर ज़मीन खरीदी थी। लेकिन इसे ₹54 करोड़ की बढ़ी हुई कीमत पर खरीदा गया था। इस लेन-देन के दौरान कई प्रक्रियात्मक और विनियामक नियमों का उल्लंघन किया गया है। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने बिना किसी देरी के सख्त एक्शन लिया है। उन्होंने 3 जून, 2025 को तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट, नगर आयुक्त और SDM समेत कुल सात लोगों को निलंबित कर दिया था।
गौरतलब है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले भी यह बात कई बार दोहराई है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। ताजा एक्शन उनकी इसी नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामला सामने आया था, तभी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर ही उन्होंने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी थी। मुख्यमंत्री धामी के इस एक्शन से प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। इसके साथ ही भ्रष्टाचारियों के खिलाफ यह स्पष्ट संदेश भी गया है कि गलत करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।






