उत्तराखंड के गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में मानसून सत्र शुरू हो गया है, जिसका पहला दिन मंगलवार यानी 19 अगस्त को था। विधानसभा में मानसून सत्र का पहला ही दिन काफी गर्मा-गर्मी भरा रहा। इस दौरान उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि विपक्ष के नेता सदन के भीतर ही रातभर धरने पर बैठे रहे। यहां तक कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विरोधी विधायकों को फोन करके समझाने की कोशिश भी की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र कुछ ऐसा ही घटनास्थल बन गया, जहां आज तक की राजनीति ने अपने सबसे नाटकीय अध्याय में कदम रखा। 19 अगस्त 2025 की शाम से 20 अगस्त की सुबह तक गैरसैंण विधानसभा भवन में एक दृश्य था जो शायद ही इतिहास भूल पाएगा, विपक्ष के नेता धरने पर बैठे, लेकिन वो बाहर नहीं, बल्कि सदन के भीतर ही रात गुजारने को मजबूर हो गए। दरअसल, इसकी वजह सदन में मानसून सत्र के पहले दिन हुआ हंगामा है।

19 अगस्त को जब शाम हुई, तो भाजपा नेता और सदन के अध्यक्ष ने विरोधियों से सदन छोड़ने का आग्रह कियाहालांकि, नाराज विपक्षी विधायकों को मनाने की काफी कोशिश की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से फोन पर बातचीत करते हुए उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के नेता मानने को तैयार नहीं हुए। उनकी मांग थी कि सदन के टाइम को और बढ़ाया जाए। जिसके चलते सभी सदन में ही रुके रहे। सदन में चल रहे इस धरने में कांग्रेस के 19 विधायकों के साथ निर्दलीय विधायक उमेश कुमार भी शामिल रहे हैं

विपक्ष के विधायकों का आरोप था कि नैनीताल क्षेत्र में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान यशपाल आर्य के साथ धक्का-मुक्की हुई, और राज्य में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। उन्होंने नियम 310 के तहत इस मामले पर चर्चा की मांग की, लेकिन सरकार ने समय सारिणी के अनुसार सत्र आगे बढ़ा दिया। जिसके बाद से सत्र की शुरुआत होते ही कांग्रेस के विधायकों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे के दौरान माइक उखाड़ दिए गए और टेबल को भी पलट दिया गया। जिसके चलते विधानसभा की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा।