उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम अब केवल अपने प्रदेश तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि उनकी कार्यशैली और पहचान की गूंज सुदूर बंगाल तक सुनाई देने लगी है। इसी क्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में अपने पैतृक गांव पंचूर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली और प्रदेश के प्रति उनके समर्पण की जमकर प्रशंसा की है। मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर कहा कि योगी आदित्यनाथ का अपने प्रदेश उत्तर प्रदेश और अपने मूल क्षेत्र उत्तराखंड से गहरा आत्मीय जुड़ाव है, जो उनकी कार्यप्रणाली में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक सशक्त और प्रभावी कानून व्यवस्था स्थापित हुई है, जिसकी बदौलत उन्हें ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से एक विशिष्ट पहचान मिली है। मुख्यमंत्री धामी बोले, अब यह पहचान केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गूंज अब सुदूर पश्चिम बंगाल तक भी सुनाई देने लगी है, जो उनकी लोकप्रियता और प्रशासनिक दृढ़ता का प्रमाण है।
इसी क्रम में, गुरुवार को गुरु गोरखनाथ महाविद्यालय में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महाविद्यालय की शैक्षिक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त और महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में उभरा है। उन्होंने घोषणा की कि महाविद्यालय में जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संबंधित कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा और विद्यार्थियों के शारीरिक विकास हेतु एक मिनी स्टेडियम का निर्माण भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री धामी ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए सफलता के सूत्र बताए। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत और अनुशासन का पालन करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही दो स्तंभ व्यक्ति को उसकी मंजिल तक पहुंचाते हैं।
सीएम योगी ने बंजर और खाली पड़े खेतों पर व्यक्त की चिंता
अपने पैतृक गांव पंचूर की यात्रा के दौरान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रास्ते में दिखाई दिए बंजर और खाली पड़े खेतों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। मुख्यमंत्री योगी ने इस बात पर जोर दिया कि पहाड़ों में खेती योग्य उपजाऊ भूमि का इस प्रकार खाली पड़ा रहना उचित नहीं है और यह एक गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि इन खेतों को पुनः आबाद करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि बंजर भूमि किसी भी दृष्टि से अच्छी नहीं लगती। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को पुनः बढ़ावा दें, क्योंकि गांवों की वास्तविक पहचान उनकी खेती-बाड़ी और चारों ओर फैली हरियाली से ही होती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कृषि भूमि का समुचित उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों के लिए अपरिहार्य है।
सीएम योगी ने बताया उत्तराखंड की लोक परंपराओं का महत्व
इसी अवसर पर, योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जागर गाथाएं हमारी सदियों पुरानी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि देवी-देवताओं को समर्पित ये जागर हमारी प्राचीन परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं और वस्तुतः यही हमारी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान भी हैं। उन्होंने आगे कहा कि लोक संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ी ये जागर गाथाएं वर्तमान समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का पुनीत कार्य करती हैं, साथ ही नई पीढ़ी को उनकी गौरवशाली विरासत और पूर्वजों के मूल्यों से परिचित कराती हैं, जिससे सांस्कृतिक निरंतरता बनी रहती है।
कार्यक्रम मंच पर पहुंचते ही, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने उद्बोधन की शुरुआत अत्यंत उत्साहपूर्ण ढंग से की। उन्होंने ‘सत्य सनातन धर्म की जय’, ‘भारत माता की जय’ और ‘गंगे मैया की जय’ जैसे ओजस्वी जयकारों के साथ अपना संबोधन प्रारंभ किया, जिससे पूरे वातावरण में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। इन जयकारों के पश्चात, उन्होंने मंच पर उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन किया। कार्यक्रम के समापन से पूर्व, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वहां उपस्थित छोटे बच्चों के साथ भी आत्मीय संवाद स्थापित किया। उन्होंने बच्चों को स्नेहपूर्वक चॉकलेट वितरित की और उनसे उनका नाम भी पूछा, जिससे बच्चों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। यह क्षण उनकी सहजता और बच्चों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।






