टनकपुर: शारदा घाट का वातावरण रविवार को ढोल-दमाऊँ और कुमाऊँनी लोकधुनों की मधुर लय से गूंज उठा, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पारंपरिक माघ खिचड़ी भोज के अवसर पर स्थानीय लोगों के बीच पहुंचे। उन्होंने न केवल इस धार्मिक आयोजन में हिस्सा लिया, बल्कि कुमाऊँ की प्राचीन लोक परंपरा “खड़ी होली” में भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी पूरी तरह से स्थानीय रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने श्रद्धालुओं को स्वयं खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया और फिर स्थानीय नागरिकों के साथ जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। उनका यह सादगी भरा अंदाज लोगों को काफी पसंद आया।
खड़ी होली में गूंजे पारंपरिक गीत
इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण तब बना जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्थानीय महिलाओं के साथ खड़ी होली में शामिल हुए। पारंपरिक कुमाऊँनी वेशभूषा में सजी महिलाओं ने एक घेरा बनाकर लोकगीत गाए, जिसमें मुख्यमंत्री ने भी उनके साथ सुर में सुर मिलाया। इस दौरान पूरा माहौल भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक गौरव से भर गया। टनकपुर की गलियों में गूंजती खड़ी होली ने कुमाऊँ की जीवंत और समृद्ध लोक परंपराओं की एक खूबसूरत झलक पेश की।
‘परंपराएं समाज को एक सूत्र में बांधती हैं’
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में माघ मास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह महीना श्रद्धा, सादगी और समरसता का प्रतीक है।
“खिचड़ी भोज जैसी परंपराएँ हमारे समाज को एक सूत्र में बांधने का काम करती हैं। वहीं, खड़ी होली जैसी लोक विधाएँ हमें अपनी जड़ों, संस्कृति और विरासत से जोड़ती हैं। ऐसी परंपराएं सामाजिक एकता को मजबूत करती हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराती हैं।”- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री धामी के इस कार्यक्रम में शामिल होने से स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखा गया। उन्होंने मुख्यमंत्री के इस कदम को प्रदेश की लोक संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।





