नीमच जिले के ग्राम गिरदौड़ा में प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहाँ एक तरफ पीड़ित परिवार न्यायालय का ‘स्थगन आदेश’ (Stay Order) दिखाता रहा, वहीं दूसरी ओर पुलिस और राजस्व विभाग के साए में कुछ लोग खेत में घुसकर जबरन चने की फसल उखाड़ते रहे। इस पूरी घटना के वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस होती दिखाई दे रही है।
क्या है पूरा विवाद?
जानकारी के अनुसार, विवाद ग्राम गिरदौड़ा स्थित कृषि भूमि पर खड़ी चने की फसल को लेकर है। पीड़ित नत्थू बाई (पति स्व. बालमुकुंद लोहार) का आरोप है कि न्यायालय द्वारा जमीन पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश जारी किया गया है। इसके बावजूद, शनिवार को पटवारी सुमित शर्मा, पुलिस बल और विपक्षी दल के नाथूलाल माली व अशोक माली ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर खेत पर पहुँच गए।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने जब फसल काटने का विरोध किया और तहसीलदार व न्यायालय के आदेश की प्रति दिखाई, तो आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने उनकी एक न सुनी। वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला आरक्षक बिंदु तंवर और अन्य पुलिसकर्मी ग्रामीणों को वीडियो बनाने से रोक रहे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि प्रशासन ने न केवल कोर्ट के आदेश की अवहेलना की, बल्कि विरोध करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया गया।
न्यायालय का क्या है आदेश?
प्रकरण क्रमांक 04/2026 (नत्थू बाई बनाम अन्य) में व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड, नीमच ने स्पष्ट आदेश दिया था कि “प्रतिवादीगण को वादग्रस्त भूमि की स्थिति के संबंध में आगामी आदेश तक यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने हेतु निर्देशित किया जाता है। इसके बावजूद प्रशासन की मौजूदगी में फसल की कटाई होना, सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है।
तहसीलदार को सौंपी गई शिकायत
घटना के बाद पीड़िता नत्थू बाई ने तहसीलदार को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि विपक्षी दल ने पुलिस की शह पर उनकी मेहनत की फसल को लूट लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ही कोर्ट के आदेशों को नहीं मानेगा, तो आम आदमी न्याय के लिए कहाँ जाएगा?





