राज्यसभा में हाल ही में एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा। राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य सी. सदानंदन मास्टर ने अपने पहले भाषण के दौरान अपने कृत्रिम पैर (prosthetic legs) निकालकर मेज पर रख दिए। इस घटना पर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी हिम्मत की तारीफ की, वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इसे ‘नाटक’ बताकर इसकी आलोचना की।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब सदानंदन मास्टर ने सदन को संबोधित करते हुए उस राजनीतिक हिंसा का जिक्र किया जिसमें उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग तीन दशक पहले माकपा कार्यकर्ताओं ने उन पर जानलेवा हमला किया था। इस घटना के बाद सदन में काफी हंगामा हुआ।
पीएम मोदी ने पत्र लिखकर की प्रशंसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदानंदन मास्टर के भाषण की तारीफ करते हुए उन्हें एक पत्र लिखा। पीएम मोदी ने कहा कि उनके भाषण में ‘नैतिक शक्ति और दृढ़ विश्वास’ की झलक दिखी। उन्होंने लिखा, “आप भले ही संसद में नए हों, लेकिन आप अपने साथ ‘राष्ट्र प्रथम’ की विचारधारा के प्रति जीवन भर की सेवा और प्रतिबद्धता लेकर आए हैं।”
पीएम ने आगे उस हमले का जिक्र करते हुए कहा, “लोग यह पचा नहीं पा रहे थे कि हमारे जैसे जीवंत लोकतंत्र में एक मेहनती शिक्षक पर एक पिछड़ी सोच वाली विचारधारा के समर्थक इस तरह हमला कैसे कर सकते हैं। आज, यह ध्यान देने वाली बात है कि वह पिछड़ी सोच वाली विचारधारा बहुत सिकुड़ गई है, जबकि आप गर्व से संसद में बैठे हैं।”
“सच में बहुत खुशकिस्मत हूं। राज्यसभा में मेरे पहले भाषण के लिए विश्व विख्यात श्री नरेंद्र मोदी जी की तरफ से प्रशंसा पत्र मिला। देश और उसके नेता से मिली यह अनमोल हौसलाअफजाई मेरे मकसद और सेवा की भावना को बहुत ताकत देगी।” — सी. सदानंदन मास्टर, राज्यसभा सांसद (X पर पोस्ट में)
कौन हैं सदानंदन मास्टर?
केरल के त्रिशुर के रहने वाले सी. सदानंदन मास्टर एक सेवानिवृत्त हाई स्कूल शिक्षक हैं। वे 1999 से पेरामंगलम के श्री दुर्गा विलासम हायर सेकेंडरी स्कूल में सामाजिक विज्ञान पढ़ाते थे। अपने छात्र जीवन में वे माकपा की छात्र इकाई स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े थे, लेकिन 1984 में उन्होंने SFI छोड़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का दामन थाम लिया। बाद में वह RSS से भाजपा में आए और पार्टी के लिए काम करते रहे।
जब राजनीतिक हिंसा में गंवाए दोनों पैर
सदानंदन मास्टर ने जिस घटना का जिक्र किया, वह 25 जनवरी 1994 की है। कन्नूर जिले में स्थित उनके घर पर कुछ लोगों ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया था। यह इलाका राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात रहा है। इस हमले में उनके दोनों पैर इतने गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे कि उन्हें काटना पड़ा। आरोप है कि यह हमला माकपा समर्थकों द्वारा किया गया था। इस विवाद की जड़ एक स्थानीय मुद्दे से जुड़ी थी, जिसमें माकपा के एक कार्यकर्ता के बच्चों को जन्माष्टमी के एक कार्यक्रम में शामिल करने को लेकर विवाद हुआ था।
भाजपा ने उन्हें 2016 और 2021 में कुन्नूर जिले की कूत्तुपरम्बा विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन दोनों ही बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वह तीसरे स्थान पर रहे। हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है।





