Hindi News

क्या आगे बढ़ेगी पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया की डेडलाइन? CEO ने चुनाव आयोग से मांगी एक हफ्ते की मोहलत

Published:
बंगाल एसआईआर की तारीख बढ़ सकती है। सीईओ ने चुनाव आयोग को विस्तार प्रस्ताव भेजा है। वोटर लिस्ट जारी होंने में देरी हो सकती है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट SIR को लेकर अगली सुनवाई करने वाला है। 
क्या आगे बढ़ेगी पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया की डेडलाइन? CEO ने चुनाव आयोग से मांगी एक हफ्ते की मोहलत

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (West Bengal SIR) को लेकर पहले से ही राजनीति गरमाई हुई है। अब एससआईआर कार्यक्रम से जुड़े बड़ी अपडेट सामने आई है। बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने चुनाव आयोग से एक सप्ताह अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया है। सुनवाई, नोटिस फेज और दस्तावेज सत्यापन की तारीख आगे बढ़ सकती है। इसके संकेत शनिवार को सीओ मनोज अग्रवाल ने दिए हैं।

सीईओ का कहना है कि कई जिलों में एसआईआर का नोटिस फेज पेंडिंग हैं। कई स्थानों सुनवाई पूरी नहीं हुई हैं। वहीं कुछ स्थानों पर दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए हैं। कुछ फाइनल डीसीजन आना बाकी है। जिसे देखते हुए उन्होंने 7 दिन के एक्सटेंशन का प्रस्ताव चुनाव आयोग को भेजा है। यदि डेडलाइन आगे बढ़ती है तो फाइनल वोटर लिस्ट आने में भी देरी हो सकती है।

14 फरवरी फाइनल वोटर लिस्ट की तारीख 

मौजूदा कार्यक्रम के मुताबिक 16 जनवरी से 7 फरवरी तक नोटिस फेज जारी रहने वाला था। यानि सुनवाई और दस्तावेज सत्यापन की आखिरी तारीख 7 फरवरी 2026 तय की गई थी। फाइनल इलेक्टॉरल रोल 14 फरवरी 2026 को जारी किया जाएगा। इसमें शामिल मतदाताओं को ही आगामी चुनाव में वोट देने की अनुमति होगी। ड्राफ्ट रोल 16 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था। इस पर आपत्ती और दावों के लिए 16 दिसंबर 2025 से लेकर 19 जनवरी 2026 तक तक समय दिया गया है। लाखों लोगों के नाम हटाए गए थे। जिसे लेकर अभी भी राज्य में विवाद जारी है।

सोमवार को SC की अगली सुनवाई 

चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच विशेष गहन संशोधन को लेकर टकराव अभी भी जारी है। जिसे लेकर ममता बनर्जी ने बुधवार को खुद सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका की पैरवी की थी। उन्होंने चुनाव आयोग पर कई सवाल उठाए थे। माइक्रो आब्जर्वर की नियुक्ति और पर भी सवाल खड़े किए थे। इसके अलावा गलत तरीके से 58 लाख मतदाताओं का नाम हटाने का आरोप भी लगाया था।

जिसका पलटवार करते हुए निर्वाचन आयोग ने भी अपने में ममता बनर्जी के सार्वजनिक बयानों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने उनके भाषण को भड़काऊ बताया। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चुनाव आयोग को त्रुटियों को सुधारते समय अधिक संवेदनशील रहने का निर्देश दिया। यह सुनिश्चित करने को कहा कि वास्तविक नागरिक के नाम नाम सूची से न काटे जाए।  अगले सुनवाई सोमवार को होने वाली है।

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey
Follow Us :GoogleNews