उत्तराखंड के खाली होते पहाड़ी गांवों को फिर से आबाद करने और पलायन पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक ठोस योजना तैयार की है। सरकार अब ‘प्रवासी पंचायत’ के माध्यम से उन लोगों तक पहुंचेगी जो रोजगार के लिए अपने गांव छोड़कर शहरों में बस गए हैं। इस अहम पहल की शुरुआत 24 अप्रैल को टिहरी जिले से होने जा रही है।
उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग को इस कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। योजना के तहत, नवंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में क्रमबद्ध तरीके से इन पंचायतों का आयोजन पूरा कर लिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य प्रवासियों को वापस गांव लौटने के लिए प्रेरित करना और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
सफल कहानियों से मिलेगी प्रेरणा
इन प्रवासी पंचायतों की सबसे खास बात यह होगी कि इनमें उन लोगों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा जो पहले ही ‘रिवर्स पलायन’ कर चुके हैं। यानी, जो शहरों की नौकरी छोड़कर गांव लौटे और यहां अपना सफल व्यवसाय खड़ा किया। ये लोग खेती, बागवानी, होमस्टे, डेयरी या मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। उनकी सफलता की कहानियां दूसरे प्रवासियों को गांव वापस लौटने के लिए प्रोत्साहित करेंगी।
“पहाड़ों को फिर से बसाने और संवारने के लिए सरकार गंभीर है। प्राथमिकता के आधार पर इसको लिया जा रहा है। पिछले काफी समय में हमने बेहतर काम किया है। लोग अब अपने गांवों में लौट रहे हैं। इसके लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाओं को और बेहतर किया जा रहा है।” — एस.एस. नेगी, उपाध्यक्ष, उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग
6 हजार से ज्यादा लोग कर चुके हैं रिवर्स पलायन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह पहल सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि सफल परिणामों पर आधारित है। आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी ने बताया कि पिछले चार वर्षों में 6,000 से अधिक लोग रिवर्स पलायन कर चुके हैं। इन्हीं सकारात्मक नतीजों से उत्साहित होकर सरकार ने ‘प्रवासी पंचायत’ जैसे बड़े आयोजन का फैसला किया है।
पंचायत के दौरान विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहेंगे और सरकार की स्वरोजगार योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। सरकार का प्रयास है कि पहाड़ के लोगों को रोजी-रोटी के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर न जाना पड़े और सूने पड़े गांव एक बार फिर से आबाद हों। इसके लिए बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी दुरुस्त किया जा रहा है।






