उत्तराखंड के हाल ही में संपन्न त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में बीजेपी ने 12 में से 11 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट जीतकर सबको चौंका दिया। देहरादून ही ऐसा जिला रहा जहां कांग्रेस की जीत हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का असर तो दिखा, लेकिन इस जीत का असली श्रेय पर्दे के पीछे काम करने वाले संगठन महामंत्री अजेय कुमार को दिया जा रहा है। कौन हैं ये ‘असली चाणक्य’? आइए जानते हैं।
विधानसभा से पंचायत तक बीजेपी की लहर
उत्तराखंड में बीजेपी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में 47 सीटें जीतकर दोबारा सत्ता पाई। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में सभी 5 सीटें पार्टी ने अपने नाम कीं। अब 2025 के पंचायत चुनाव में भी बीजेपी ने 11 जिलों में जीत दर्ज की है।
ये लगातार तीसरी बड़ी जीत है, जो दर्शाती है कि बीजेपी का संगठन राज्य में मजबूत और सक्रिय है। इस जीत के पीछे जहां मुख्यमंत्री का नेतृत्व है, वहीं रणनीति के स्तर पर संगठन की मेहनत सबसे अहम रही है।
संगठन महामंत्री अजेय कुमार: जीत के असली रणनीतिकार
अजेय कुमार को 15 सितंबर 2019 को उत्तराखंड बीजेपी का संगठन महामंत्री बनाया गया था। उस समय पार्टी राज्य में अंदरूनी मतभेदों और कमजोर होते जनाधार से जूझ रही थी। लेकिन अजेय कुमार ने सबसे पहले नाराज़ और पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़ा, गुटबाजी खत्म की और संगठन को एकजुट किया।
उनकी रणनीति का असर विधानसभा, लोकसभा और अब पंचायत चुनावों में साफ देखा गया। अजेय कुमार हमेशा पर्दे के पीछे रहते हैं, लेकिन संगठन में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है।
पहाड़ों की गहराई से वाकिफ, संघ की पृष्ठभूमि
अजेय कुमार कोई बाहरी नेता नहीं हैं। उन्होंने अपने जीवन के कई साल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जिला प्रचारक के रूप में अल्मोड़ा से लेकर उधम सिंह नगर तक बिताए हैं। वह उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति को बारीकी से समझते हैं।
संघ से आए अजेय कुमार जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं। वह प्रचारक के रूप में जनसंपर्क, संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं को जोड़े रखने की कला में माहिर हैं। यही वजह है कि आज उन्हें ‘उत्तराखंड का चाणक्य’ कहा जा रहा है।
सौम्यता और संगठन की ताकत से बना रहे हैं पहचान
अजेय कुमार की सबसे बड़ी ताकत है- सौम्य स्वभाव, विवादों से दूरी, और संगठन पर पकड़। वह सामने आकर भाषण नहीं देते, लेकिन कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुनते हैं, सुलझाते हैं और सही लोगों को सही जिम्मेदारी देकर संगठन को मजबूत करते हैं।
पंचायत चुनावों में जिस तरीके से उम्मीदवारों का चयन, प्रचार और रणनीति बनी, उसमें अजेय कुमार की सीधी भागीदारी थी। मुख्यमंत्री धामी ने सरकार का चेहरा संभाला, तो अजेय कुमार ने ज़मीन पर काम करने वालों को एकजुट रखा।





