उत्तराखंड ने रचा कीर्तिमान, ‘वन डेटा, वन एंट्री’ सिस्टम से राज्य ने मारी बाजी, ICJS रैंकिंग में नंबर-1 स्थान किया हासिल

उत्तराखंड ने भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण में एक बड़ी सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 के कार्यान्वयन में 93.46 के स्कोर के साथ देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सीधी निगरानी और 'वन डेटा, वन एंट्री' प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है।
CM Pushkar Singh Dhami

देहरादून: आपराधिक न्याय और कानून प्रवर्तन प्रणाली के डिजिटलीकरण में उत्तराखंड ने देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 परियोजना को लागू करने में उत्तराखंड 93.46 के उत्कृष्ट स्कोर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष पर काबिज हुआ है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी CCTNS/ICJS प्रोग्रेस डैशबोर्ड के अनुसार यह रैंकिंग जारी की गई है। यह उपलब्धि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस दृष्टिकोण को साकार करती है, जिसमें तकनीक-आधारित, त्वरित और पारदर्शी न्याय प्रणाली पर जोर दिया गया है। उत्तराखंड की सफलता को ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ की दिशा में एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

टॉप 5 में इन राज्यों ने बनाई जगह

एनसीआरबी की राष्ट्रीय रैंकिंग में उत्तराखंड के बाद अन्य राज्यों का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा। हालांकि, उत्तराखंड ने एक करीबी मुकाबले में पहला स्थान हासिल किया। शीर्ष पांच राज्यों की सूची इस प्रकार है:

  • उत्तराखंड: 93.46
  • हरियाणा: 93.41
  • असम: 93.16
  • सिक्किम: 91.82
  • मध्य प्रदेश: 90.55

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि देश भर में राज्यों के बीच अपनी न्यायिक और पुलिस प्रणालियों को आधुनिक बनाने की एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा चल रही है।

‘वन डेटा, वन एंट्री’ सिस्टम बना सफलता का आधार

उत्तराखंड की इस जीत के पीछे ICJS 2.0 की ‘वन डेटा, वन एंट्री’ प्रणाली की अहम भूमिका है। इस सिस्टम के तहत पुलिस (CCTNS), ई-कोर्ट, ई-जेल, ई-अभियोजन और ई-फॉरेंसिक जैसे सभी स्तंभों को एक-दूसरे से डिजिटल रूप से जोड़ा गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसी भी मामले से जुड़ा डेटा एक बार दर्ज होने के बाद सभी संबंधित विभागों को तुरंत और बिना किसी बाधा के उपलब्ध हो जाता है।

इस प्रणाली ने न केवल भारी-भरकम कागजी कार्रवाई को कम किया है, बल्कि मामलों के निस्तारण में भी अभूतपूर्व तेजी लाई है। उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता और पुलिस महानिरीक्षक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) सुनील कुमार मीणा ने इस रैंकिंग की पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य ने न केवल तकनीकी ढांचे को सफलतापूर्वक लागू किया है, बल्कि रियल-टाइम डेटा एंट्री में भी रिकॉर्ड बनाया है, जिसकी सराहना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी की है।

सीएम धामी की ‘मिशन-मोड’ निगरानी

इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘मिशन-मोड’ क्रियान्वयन को भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने शासन के शीर्ष अधिकारियों से लेकर जिला स्तर के फील्ड अधिकारियों तक के साथ लगातार समीक्षा बैठकें कीं। इस ‘टॉप-टू-बॉटम’ मॉनिटरिंग के कारण जमीनी स्तर पर आने वाली तकनीकी बाधाओं को समय पर दूर किया गया।

इसके अलावा, प्रदेश के 23,000 से अधिक पुलिस कर्मियों को नए कानूनों और तकनीकी प्रणालियों की बारीकियों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया। ‘न्याय श्रुति’ के माध्यम से वर्चुअल अदालती सुनवाई और फॉरेंसिक मोबाइल वैन की उपलब्धता जैसे कदमों ने भी इस प्रक्रिया को मजबूत किया।

Banshika Sharma
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मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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