उत्तराखंड की राजनीति में शुक्रवार शाम एक नया मोड़ आ गया। नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान लापता बताए जा रहे कांग्रेस समर्थित पांच जिला पंचायत सदस्य अचानक वीडियो के जरिए सामने आ गए। कांग्रेस ने इन सदस्यों के कथित अपहरण का आरोप लगाया था, लेकिन सदस्यों ने खुद इसका खंडन किया है। इन सदस्यों ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि वे पूरी तरह से सुरक्षित हैं और अपनी मर्जी से घूमने गए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके अपहरण की खबरें निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।
क्या बोले लापता सदस्य
वीडियो में सभी सदस्य- दीगर मेवाड़ी, विपिन जंतवाल, दीपक बिष्ट, तरुण शर्मा और प्रमोद कोटलिया एक साथ नजर आ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि मीडिया और विपक्षी दलों के माध्यम से उनके बारे में गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। उन्होंने अपने परिवारों को आश्वस्त किया कि उन्हें किसी भी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। सभी ने दावा किया कि वे बहुत जल्द अपने घर लौटेंगे। इतना ही नहीं, सदस्यों ने अपने शपथपत्र (एफिडेविट) भी कोर्ट में जमा कर दिए हैं, जिसमें उन्होंने अपहरण की बात को नकारते हुए खुद को सुरक्षित बताया है।
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कांग्रेस का आरोप और सियासी संग्राम
गौरतलब है कि 14 अगस्त को नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की वोटिंग के दौरान अचानक पांच कांग्रेस समर्थित सदस्य गायब हो गए थे। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी समर्थक नेताओं और बाहरी दबंगों ने इन सदस्यों को हथियारों के बल पर अगवा कर लिया है।
इस आरोप के बाद कांग्रेस नेताओं ने जमकर प्रदर्शन किया और एसएसपी कार्यालय के बाहर धरना भी दिया। मामला राजनीतिक तूल पकड़ गया और हाईकोर्ट तक पहुंच गया। हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव स्थगित कर दिया था और 18 अगस्त तक टाल दिया।
वीडियो से बदला माहौल, पुलिस को राहत
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन ने राहत की सांस ली है। अब पुलिस का कहना है कि जल्द ही ये सभी सदस्य अपने घर लौट आएंगे और स्थिति सामान्य हो जाएगी। हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह वीडियो दबाव में जारी किया गया है और इसके पीछे सच्चाई की जांच की जानी चाहिए। उधर, बीजेपी नेताओं ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति करार दिया है। उनका कहना है कि कांग्रेस जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहती है।
नैनीताल जिला पंचायत चुनाव से जुड़ा यह घटनाक्रम अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस के अपहरण के आरोप और सदस्यों के वीडियो बयान ने पूरे मामले को उलझा दिया है। अब सबकी नजरें सोमवार को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस विवाद पर बड़ा फैसला तय कर सकती है।