इंसान की संवेदनशीलता और बेजुबान प्राणियों के प्रति करुणा की एक अनोखी मिसाल मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में देखने को मिली है, जहां उफनती बेतवा नदी के बीच फंसे कुछ आवारा कुत्तों को बचाने के लिए प्रशासनिक अमला और आपदा प्रबंधन की टीम सक्रिय हो गई। विदिशा में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण बेतवा नदी उफान पर है। नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है और विदिशा-बासौदा में पानी पुल के ऊपर से बह रहा है।
वहीं इसी उफनती बेतवा नदी के बीचों-बीच प्रसिद्ध चरणतीर्थ मंदिर स्थित है। चारों तरफ से पानी से घिरे इस मंदिर तक आने-जाने का एकमात्र रास्ता बेतवा का जलस्तर बढ़ने के कारण पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। इसी मंदिर परिसर में चार-पांच आवारा कुत्ते फंस गए थे।

मदद के लिए भौंक रहे थे बेजुबान
दरअसल जलस्तर लगातार बढ़ने की वजह से इन कुत्तों के पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा था। संकट में घिरे ये बेजुबान जीव मदद के लिए लगातार रो रहे थे और लंबी-लंबी आवाजें निकालकर भौंक रहे थे। इसी दौरान कुछ संवेदनशील लोगों की नजर इन बेजुबान प्राणियों पर पड़ी। संकट में फंसे इन कुत्तों को देखकर उन लोगों के मन में करुणा जागी और उन्होंने तुरंत इस स्थिति का वीडियो बना लिया।
स्थानीय लोगों ने इस वीडियो को समाजसेवियों और पत्रकारों तक पहुंचाया। पत्रकारों और समाजसेवियों ने भी बिना किसी देरी के इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लिया और बेजुबानों की जान बचाने के लिए सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों तक आवाज पहुंचाई।
मोटर बोट लेकर उफनती नदी में उतरी रेस्क्यू टीम
वहीं मामले की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया। उन्होंने इन बेजुबान जीवों के प्राणों के महत्व को समझते हुए बिना समय गंवाए उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के आदेश दिए। आदेश मिलते ही आपदा प्रबंधन की टीम हरकत में आ गई। जवान मोटर बोट लेकर उफनती बेतवा नदी के तेज बहाव के बीच उतर पड़े। आपदा प्रबंधन की टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर बेहद कठिन परिस्थितियों में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
सभी कुत्तों को सुरक्षित बाहर निकाला
दरअसल अपनी कड़ी मेहनत, सूझबूझ और बेहतरीन कौशल के दम पर इन जांबाज जवानों ने चरणतीर्थ मंदिर में फंसे सभी कुत्तों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस तरह इंसान के सबसे वफादार साथी माने जाने वाले इन बेजुबान जीवों को संकट से सुरक्षित बचा लिया गया। यह रेस्क्यू ऑपरेशन मानवीय संवेदनाओं और कर्तव्यपरायणता का एक बेहतरीन उदाहरण है। इस पूरे घटनाक्रम में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाला हर व्यक्ति धन्यवाद का पात्र है।






