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आगर मालवा: ‘जनसुनवाई’ बंद करने की उठी मांग, कलेक्टर को आवेदन देकर कहा- ‘जनता का समय और पैसा हो रहा बर्बाद’

Reported by:Gaurav Sarvariya|Edited by:Banshika Sharma
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मध्य प्रदेश के आगर मालवा में एक स्थानीय निवासी ने जनसुनवाई कार्यक्रम की उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कलेक्टर को एक लिखित आवेदन सौंपकर इसे बंद करने की मांग की है, क्योंकि इससे आम लोगों को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है।
आगर मालवा: ‘जनसुनवाई’ बंद करने की उठी मांग, कलेक्टर को आवेदन देकर कहा- ‘जनता का समय और पैसा हो रहा बर्बाद’

Agar Malwa Collectorate Office

आगर मालवा। जिले में हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई को लेकर एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक नागरिक ने इस पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे बंद करने की मांग कर दी है। आगर मालवा तहसील के गांव बापचा निवासी प्रेम नारायण यादव ने जिला कलेक्टर को एक लिखित आवेदन देकर कहा है कि जनसुनवाई से आम जनता को कोई ठोस फायदा नहीं हो रहा है।

यह आवेदन 20 जनवरी 2026 को प्रस्तुत किया गया है, जिसमें प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदक का कहना है कि यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गया है, जहां लोगों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता।

क्यों बंद होनी चाहिए जनसुनवाई?

प्रेम नारायण यादव ने अपने आवेदन में कई तर्क दिए हैं। उन्होंने लिखा है कि जनसुनवाई में ज्यादातर किसान, मजदूर और गरीब वर्ग के लोग ही अपनी फरियाद लेकर पहुंचते हैं। वे अपना काम-धंधा छोड़कर और किराया खर्च करके जिला मुख्यालय आते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर समय पर कार्रवाई नहीं होती।

आवेदन में इस बात का भी उल्लेख है कि जनसुनवाई में प्रभावशाली व्यक्ति या जनप्रतिनिधि नहीं दिखते, केवल आम लोग ही कतारों में खड़े रहते हैं। यादव का आरोप है कि अगर प्रशासनिक अधिकारी अपने कार्यालयों में ही लोगों के काम सही तरीके से करें तो जनसुनवाई जैसे कार्यक्रमों की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

पुराने आवेदनों की समीक्षा की मांग

आवेदक ने प्रशासन को एक सुझाव भी दिया है। उन्होंने मांग की है कि पिछली जनसुनवाइयों में आए आवेदनों की समीक्षा की जाए। इससे यह पता चल सकेगा कि कितने मामलों का वास्तव में निराकरण हुआ और कितने अभी भी लंबित हैं।

उनके अनुसार, इस समीक्षा से यह स्पष्ट हो जाएगा कि जनसुनवाई की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। यदि समय और संसाधन खर्च करने के बाद भी लोगों को न्याय नहीं मिल रहा है, तो यह व्यवस्था आम जनता के लिए एक परेशानी का सबब बन चुकी है। फिलहाल, इस अनूठे आवेदन पर जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

 

गौरव सरवारिया की रिपोर्ट