Jaisalmer Desert Festival में इन जगहों की जरूर करें सैर, समृद्ध इतिहास और परंपरा का करें दीदार

Jaisalmer Desert Festival

Jaisalmer Desert Festival: जैसलमेर में 22 फरवरी यानी की आज से डेजर्ट फेस्टिवल की शुरुआत होने जा रही है। ये उत्सव 24 फरवरी तक चलने वाला है जिसमें कई पर्यटक शामिल होंगे। अगर आप भी इसका हिस्सा बनने के बारे में सोच रहे हैं तो यहां आस पास कुछ जगह मौजूद है। जहां पर आपको घूमने जरूर जाना चाहिए। चलिए इन शानदार जगहों के बारे में जानते हैं।

पटवों की हवेली

पूरी तरह से सुनहरे रंग से सजी हुई ये हवेली आपका दिल जीत लेने वाली है। जब आप यहां जाएंगे तो आपको लगेगा की आप किसी सोने के महल में घूम रहे हैं। आप इतिहास जानने के शौकीन हैं तो ये जगह आपके लिए ओर भी बेस्ट है। 1805 में बनी ये हवेली अपने शानदार इतिहास के लिए पहचानी जाती है। अगर आप यहां घूमना चाहते हैं तो सुबह 8 से 6 बजे तक ये खुली रहती है। यहां घूमने आने वाले भारतीय पर्यटकों से 10 रुपए और विदेशी पर्यटकों से 50 रुपए किराया लिया जाता है।

खाबा किला

अगर आप जैसलमेर घूमने के बारे में सोच रहे हैं तो यहां का खाबा फोर्ट भी बहुत शानदार है। 13वीं शताब्दी में बनाई गई ये जगह एक बंजर रेगिस्तान में मौजूद है। यहां जाने के बाद आप इस गांव की संस्कृति और परंपराओं का आनंद ले सकते हैं। यहां आपको वास्तुशिल्प से जुड़े कई सारे आइटम्स देखने को मिल जाएंगे।

गडीसर झील

अगर आप डेजर्ट फेस्टिवल में शामिल होने के लिए जा रहे हैं तो इस झील का दीदार करना बिल्कुल ना भूलें। पानी की समस्या से बचने के लिए इस झील का निर्माण किया गया था। इसके चारों और खूबसूरत से मंदिर और गुंबद बने हुए हैं। अगर आप बोटिंग का आनंद लेना चाहते हैं तो यह जगह बेस्ट है।

Diksha Bhanupriy
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Diksha Bhanupriy

10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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