पानी की तलाश में तेंदुआ कुएं में गिरा

पानी की तलाश में तेंदुआ कुएं में गिरा

अलीराजपुर| यतेंद्रसिंह सोलंकी| फलिए में जनपद उपाध्यक्ष गोपाल चोहान के कुएं में एक तेंदुआ गिर गया| सुबह गोपाल चोहान के भाई प्रताप चोहान जब खेत पर गए तब कुएं मे पानी की खलबली के चलते पता चला कि तेंदुआ गिरा हुआ दिखा| बताया जा रहा कि तेंदुआ रा‌‌त्री के समय में कुएं में गिरा होगा । रेंज ऑफिसर वत को दि जो जोबट में होने के चलते तुरन्त ही आजाद नगर भाबरा वन विभाग की टीम को लेकर बरझर जाने की सूचना दी ।

मोके पर तुरन्त पहुंचे

जेसे ही कुएं में तेंदुऐ की गिरने की सुचना पुलिस चोकी प्रभारी आर एस मकवाना व ग्राम उप सरपंच हिमसिग बारिया को मिली वेसे ही मोके पर पहुंच गये । ग्रामीणों को जेसे ही तेंदुए के कुएं में गिरने की सुचना मिली वे से ही कुएं के पास भीड़ हो गई । पुलिस ने सभी ग्रामीणों को कुएं के पास से हटाया गया ।

पहले भी कुएं में गिर चुके तेंदुए

कदवाल जंगल बरझर से सटा होने के चलते जंगली जानवर हमेशा इधर भटक आते हे । इससे पहले भी तीन वर्ष पहले रिगोल में एक कुएं में तेंदुआ गिर गया था जिसे बड़ी मेहनत से उसे बाहर वन टीम ने निकालकर कट्ठीवाड़ा के जंगल में छोड़ दिया था ।

आर एस मकवाना, चौकी प्रभारी बरझर

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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