सिंधिया को दिन रात कोसने वाले प्रभात झा बोले- अब कंधे पर बैठाएंगे

सिंधिया को दिन रात कोसने वाले प्रभात झा बोले- अब कंधे पर बैठाएंगे

अशोकनगर| हितेंद्र बुधोलिया| कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया को पानी पी-पी कर कोसने एवं भूमाफिया बताने वाले भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा के सुर ना केवल बदल गये बल्कि वह अब सिंधिया को कंधे पर बैठाने की बात कहने लगे है। श्री झा दो दिन के अशोकनगर जिले के प्रवास पर है, इसी दौरान स्थानीय विश्राम गृह में उन्होंने पत्रकारों से चर्चा की। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्वीकारा की हर दल में खींचतान एवं गुटबाजी का होना स्वाभाविक है।

सिंधिया के सवाल पर बदले सुर
प्रभात झा से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सबसे ज्यादा उत्सुकता सिंधिया को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर रही। इसी विश्राम गृह में कुछ समय पूर्व प्रभात झा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को खूब खरी-खोटी सुनाई थी एवं उन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे । आज जब उनसे पूछा कि पुराने आरोपों के बारे में आपका क्या कहना तो श्री झा के पुराने सुर बदल गये। उनका कहना था की सिंधिया अपनी विचारधारा को बदलकर उनकी पार्टी में आ गये और वे अब उनके नेता है इसलिए उन्हें अपने कंधे पर बिठाकर आगे ले जाएंगे । साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि जिस व्यक्ति ने सरकार बदल दी हो उसके लिए एक राज्यसभा की सीट देना बहुत छोटी सी बात है। यही नहीं श्री झा ने यहां तक कह दिया कि भाजपा गंगा नदी है इसमें आकर कोई भी डुबकी लगा सकता है।

आना जाना चलता रहता है
कांग्रेस के 22 विधायकों के भाजपा में आने एवं भाजपा के नेताओं के कांग्रेस में जाने के सवाल पर श्री झा ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों में लोगों का आना जाना चलता रहता है| उनका कहना था कि जिसे अच्छा ऑफर मिल रहा है वो वहां जा सकता है । साथ ही स्थानीय स्तर पर भाजपा नेताओं के असंतुष्ट होने एवं दूसरी पार्टियों में जाने की अटकलों पर बोले जो लोग विचारधारा से जुड़े हैं वह पार्टी के लिए काम करेंगे, बाकी राजनीतिक दलों में कब कौन कहां जाता है इसकी कोई गारंटी नहीं रही। हाल ही में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एवं पिछोर विधायक केपी सिंह कक्काजू की मुलाकात को लेकर उन्होंने कहा वह दोनो पूर्व के परिचित हैं और उनकी मुलाकात अक्सर होती रहती है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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