ज्योतिष शास्त्र में बुध को ग्रहों का राजकुमार माना जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध अपनी उच्च राशि कन्या में बलवान होते हैं और नीच राशि मीन में कमजोर। बुध की स्वामी राशि मिथुन और कन्या है। वर्तमान में संचार, बुद्धि और व्यापार के कारक माने जाने वाले बुध धनु राशि (देवगुरु बृहस्पति की राशि) में विराजमान हैं। 17 जनवरी 2026 को बुध सुबह 10:27 बजे मकर राशि (दृक पंचांग के अनुसार) में गोचर करेंगे। जहां पहले से ही ग्रहों के राजा सूर्य विराजमान हैं।
मकर (शनि की राशि) में दोनों ग्रहों के आने से बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा। इसका प्रभाव 3 फरवरी 2026 तक रहेगा, क्योंकि इसके बाद बुध कुंभ राशि में गोचर कर जाएंगे। इस राजयोग का सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा, लेकिन 3 राशियों को विशेष फल प्रदान कर सकता है। आइए जानते हैं इन भाग्यशाली राशियों के बारे में…
तुला राशि पर प्रभाव:
- बुधादित्य राजयोग जातकों के लिए शुभ साबित हो सकता है।
- लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिलने की प्रबल संभावना है।
- पैतृक संपत्ति से लाभ मिल सकता है।
- इस अवधि में संपत्ति, वाहन या घर खरीद सकते हैं।
- करियर की दृष्टि से समय अनुकूल रह सकता है।
- पुराने कर्ज से मुक्ति मिलने की संभावना है।
- भौतिक सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी हो सकती है।
- नौकरीपेशा लोगों को नई नौकरी के अवसर मिल सकते हैं।
मीन राशि पर प्रभाव:
- आय में वृद्धि के प्रबल योग बनेंगे
- परिवार और किस्मत का साथ मिलेगा।
- राजनीति से जुड़े लोगों के लिए समय परिस्थितियां अनुकूल रह सकती है।
- संंतान से संबंधित कोई शुभ समाचार मिलने के संकेत हैं।
- नौकरीपेशा लोगों को नई नौकरी के लिए प्रस्ताव मिल सकते हैं।
- अविवाहितों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं।
- घर-परिवार में सुख-शांति बनी रह सकती है।
- लंबे समय से रुक हुए कामों को गति मिल सकती है।
वृषभ राशि पर प्रभाव:
- बुधादित्य राजयोग जातकों के लिए अनुकूल साबित हो सकता है।
- भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि देखने को मिल सकती है।
- छात्रों का विदेश में जाकर पढ़ाई करने का सपना पूरा हो सकता है।
- किसी धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
- समाज में मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
- भाग्य और परिवार का साथ मिल सकता है।
- आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा।
- आकस्मिक धन लाभ के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहेंगी।
कब बनता है बुधादित्य राजयोग
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आदित्य का मतलब सूर्य से होता है।
- यह राजयोग कुंडली में सूर्य और बुध के एक ही भाव (राशि) में एक साथ होने पर बनता है।
- यह राजयोग कुंडली के जिस भाव में मौजूद रहता है, उसे वह मजबूत बना देता है।
- कुंडली में बुध और सूर्य के एक साथ होने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।
- धन, सुख-सुविधा, वैभव, उच्च पद और मान-सम्मान और करियर में तरक्की मिलती है।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य वैदिक ज्योतिष मान्यताओं/पंचांग-आधारित गोचर गणना पर तैयार की गई है। व्यक्ति-विशेष पर परिणाम जन्मकुंडली, लग्न और दशा पर निर्भर करते हैं। MP Breaking News किसी भी भविष्यवाणी/दावे की गारंटी नहीं देता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)





