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Balaghat News: “मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं”, 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत पर अभिजीत दीपके का तंज

CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए जारी किया व्यंग्यात्मक ‘इस्तीफा’; बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के साथ स्वास्थ्य, मुआवजा, पेयजल और स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार पर उठाए सवाल
Abhijeet Dipke

बालाघाट। आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर कांकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने अब एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक पोस्ट के जरिए मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। दीपके ने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए राज्यपाल मंगुभाई पटेल के नाम एक प्रतीकात्मक ‘इस्तीफा’ लिखा और इसे अपने X अकाउंट पर पोस्ट किया। पत्र पर साफ तौर पर ‘satire’ भी लिखा गया है।

पोस्ट में दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा कि वे तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं और प्रदेश की जनता की सेवा करने का अवसर देने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हैं। हालांकि दीपके मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं हैं। यह पूरा पत्र सरकार पर सवाल उठाने के लिए व्यंग्य के तौर पर तैयार किया गया है।

बालाघाट में बच्चों की मौत को बनाया आधार

13 अगस्त 2026 की तारीख वाले इस पत्र में दीपके ने बालाघाट में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं और समय पर इलाज को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक रूप से इन मौतों की जिम्मेदारी खुद पर लेते हुए लिखा कि उनका ‘विवेक’ उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति नहीं देता।

मुआवजे का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने दावा किया कि शुरुआत में प्रत्येक बच्चे के परिवार के लिए ₹2 लाख की सहायता घोषित की गई थी, जिसे आदिवासी समुदाय के विरोध के बाद बढ़ाकर ₹4 लाख किया गया। इसी आधार पर उन्होंने सवाल किया कि यदि ये मंत्री या विधायकों के बच्चे होते तो क्या ₹4 लाख के मुआवजे को पर्याप्त माना जाता?

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पानी, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी उठाए सवाल

दीपके ने पत्र में बालाघाट के कुछ आदिवासी इलाकों में पेयजल की स्थिति पर भी सवाल उठाया। उनका दावा है कि ‘हर घर नल योजना’ के बावजूद कुछ परिवार पीने के पानी के लिए नदी पर निर्भर हैं।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने आरोप लगाए। दीपके के मुताबिक बालाघाट के एक गांव में आंगनवाड़ी से कक्षा पांचवीं तक करीब 75 बच्चे एक ही कमरे में पढ़ रहे हैं और स्थानीय लोगों की मांग के बावजूद उचित स्कूल भवन उपलब्ध नहीं कराया गया।

पत्र में उन्होंने मध्य प्रदेश में बिजली से वंचित आदिवासी परिवारों, अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराध और कुपोषण से जुड़े आंकड़ों का भी उल्लेख करते हुए सरकार को घेरा है। ये आंकड़े और दावे दीपके द्वारा जारी व्यंग्यात्मक पत्र का हिस्सा हैं।

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प्रभावित गांवों का दौरा कर चुके हैं दीपके

अभिजीत दीपके शनिवार को बालाघाट पहुंचे थे और बैहर विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में गए। उन्होंने बोंडरी और कोरका गांव के लोगों से मुलाकात की और बच्चों की मौत के कारणों तथा स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जानकारी जुटाई।

इस दौरान एक सोशल मीडिया पत्रकार ने दीपके से बच्चों की मौत जैसे संवेदनशील मामले पर राजनीति करने को लेकर सवाल भी किया और पूछा कि वे घटना के इतने दिन बाद क्यों पहुंचे। दीपके इस सवाल का जवाब दिए बिना आगे बढ़ गए।

अब इसके बाद सामने आए उनके व्यंग्यात्मक ‘इस्तीफे’ में बच्चों की मौत के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और आदिवासी क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं को मुद्दा बनाया गया है।

Bhawna Choubey
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