कर्मवीर बने रक्तवीर: जिला चिकित्सालय डॉक्टर और स्टाफ ने किया रक्तदान

कर्मवीर बने रक्तवीर: जिला चिकित्सालय डॉक्टर और स्टाफ ने किया रक्तदान

बैतूल| वाजिद खान| कोरोना संकट (Corona Crisis) के दौरान सरकारी अस्पताल (Government Hospital) रक्त की कमी से जूझ रहे है ऐसे में रक्त ना मिलने पर मरीजो को जान का जोखिम बना रहता है और तकलीफों का सामना करना पड़ता है । वही मध्य प्रदेश के बैतूल (Betul) में जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में भी इन दिनों रक्त की कमी हो रही है । इस कमी के चलते जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों (Doctors) और स्टाफ (Staff) ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय देते हुए 35 यूनिट रक्तदान किया ।

आज जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया । रक्तदान करने वालों की पहले थर्मल स्क्रीनिंग भी की गई। सबसे पहले रक्तकोष अधिकारी डॉ. अंकिता सीते ने रक्तदान किया और इसके बाद हृदय रोग और शुगर विशेषज्ञ डॉ. श्याम सोनी, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जगदीश घोरे, डॉ. खुशबू राठौर, अस्पताल चौकी प्रभारी सुरेन्द्र वर्मा के अलावा जिला चिकित्सालय की नर्स और स्टाफ ने 35 यूनिट रक्तदान किया । सिविल सर्जन डॉ. अशोक बारंगा का कहना है कि रक्तदान करना अच्छा कार्य और सभी को रक्तदान करना चाहिए। जिला अस्पताल के चिकित्सक और स्टाफ के द्वारा स्वप्रेरणा से रक्तदान किया । रक्तकोष अधिकारी डॉ. अंकिता सीते का कहना है कि इस समय ब्लड बैंक में रक्त की कमी के चलते डॉक्टरों और स्टाफ ने भी इसकी पूर्ति के लिए रक्तदान कर एक सराहनीय कार्य किया है। ब्लड बैंक से जिला अस्पताल में भर्ती मरीजो को रक्त उपलब्ध कराया जाता है । खासतौर पर थैलीसीमिया, सिकलसेल, गर्भवती माताएं और गभीर रूप रक्त की कमी वाले मरीजो रक्त उपलब्ध कराया जाता है ।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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