सीसीटीवी में कैद हुई काजू की चोरी, तीन में से एक आरोपी नाबालिग

सीसीटीवी में कैद हुई काजू की चोरी, तीन में से एक आरोपी नाबालिग

बैतूल/वाजिद खान

मध्य प्रदेश के बैतूल में एक गोदाम की खिड़की तोड़ कर हुई काजू की चोरी सीसीटीवी फुटेज की मदद से पकड़ी गई । इस चोरी में तीन चोर पकड़े गए जिसमें एक नाबालिग है।

मामला बैतूल के गंज थाने इलाके का है जहाँ गंज के बाबू चौक स्थित एक ट्रांसपोर्ट की गोदाम की खिड़की तोड़कर तीन चोरों ने काजू के पांच पीपे चुराकर स्कूटी से ले गए। यह पूरा नजारा सीसीटीवी कैमरे में याद हो गया जिसमे साफ दिख रहा है कि तीनों लोग एक एक कर काजू के पीपे स्कूटी के पास लाकर रख रहे हैं और उसके बाद तीनों स्कूटी से जाते भी दिख रहे हैं। ट्रांसपोर्ट मालिक राजू मिश्रा ने इस घटना की शिकायत गंज थाने में दर्ज कराई। पुलिस ने जब मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगाले तो इनमें चोरों के बारे में सुराग मिल गया । पुलिस ने तीनों चोरों को पकड़ कर जब पूछताछ की तो उनके पास से पचास हजार कीमत के काजू भी बरामद हो गए। इन चोरों में बबलू उर्फ हर्षद खान और सज्जू उर्फ सहजाद खान के अलावा एक नाबालिग भी शामिल था। पुलिस ने बबलू और सज्जू को जेल भेज दिया और नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा है।

टीआई गंज थाना सुरेश सोलंकी का कहना है कि गोदाम की खिड़की तोड़कर तीन चोरों ने काजू के पीपे चुराए थे सीसीटीवी फुटेज से ये तीनो चोर पकड़े गए और पचास हजार कीमत के काजू की बरामद कर लिए गए हैं इनमें से दो चोरों को जेल भेजा गया एक नाबालिग है उसे बाल सुधार गृह भेजा गया है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews