फेसबुक पर दोस्ती, व्हाट्सएप पर प्यार, शादी करने से बाल बाल बचा युवक, लड़की निकली तीन बच्चों की मां

फेसबुक पर दोस्ती, व्हाट्सएप पर प्यार, शादी करने से बाल बाल बचा युवक, लड़की निकली तीन बच्चों की मां

बैतूल, वाजिद खान| बैतूल (Betul) में एक 21 साल का युवक फेसबुक (Facebook) की दोस्ती के बाद शादी (Marriage) के सपने बुन रहा था पर गनीमत रही कि वह शादी से बच गया क्योंकि लड़की पहले से ही शादीशुदा और तीन बच्चों की माँ निलकी। युवक द्वारा अगर सूझबूझ न दिखाई होती तो तीन बच्चों की मां उसके गले पड़ जाती।

मामला बैतूल के हिवरखेड़ी गांव का है। जहां कालेज (College) में पढ़ने वाले 21 साल के युवक की फेसबुक पर एक युवती से दोस्ती हो गयी। दोस्ती ऐसे बढ़ी की बात प्यार मोहब्बत तक पहुच गयी। दोनो व्हाट्सएप्प चैट से लेकर कॉलिंग और वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये एक दूसरे से बात करते रहे। लेकिन तीन दिन पहले गजब तब हो गया जब युवती उत्तरप्रदेश के महू से युवक से शादी करने के इरादे से भोपाल आ गयी। उसने युवक को फोन कर भोपाल बुलाया और फिर वह उसके साथ बैतूल आ गयी। यहां उसने युवक के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया।

युवक दो दिन तक उसे टालता रहा और उसने सारे मामले का जिक्र अपने गांव के सरपंच से किया। यही नही उसने लड़की से उसका परिचय पत्र आधार आईडी मांगी तो वह कोई दस्तावेज नही दिखा सकी। आज युवक उसे आधार बनाने के बहाने बैतूल ले आया और सीधे महिला डेस्क लेकर पहुंच गया। यहां जब पड़ताल की गई तो खुलासा हुआ कि युवती की उम्र 25 साल है और वह तीन बच्चों की मां है। पति की मारपीट से तंग आकर उसने बच्चों को मां बाप के घर छोड़ दिया और बैतूल के लिए रवाना हो गयी। महिला सेल के प्रभारी डीएसपी संतोष पटेल के मुताबिक युवती के परिजनों को बैतूल बुलवाया गया है। उसे उनके सुपुर्द किया जाएगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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