महिला दिवस पर महिलाओं को सरकार का तोहफ़ा

महिला दिवस पर महिलाओं को सरकार का तोहफ़ा

बैतूल/गुना। महिला किसी भी समाज के उत्थान में एक प्रमुख किरदार होती है। कहा भी जाता है महिलाओं का विकास देश का विकास है। विश्वभर में 8 मार्च महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस महिला के सशक्तीकरण को समर्पित किया गया है। इसी महिला सशक्तिकरण का एक उदाहरण प्रदेश के बैतूल जिले में देखने को मिला है।

महिला उत्थान को बढ़ावा देने के लिए बैतूल में आज महिला डाकघरों का शुभारंभ किया गया। डाकघर का उद्घाटन छिंदवाड़ा डाक संभाग के अध्यक्ष पी एन पांडे की उपस्थिति में अतरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रद्धा जोशी ने किया। जानकारी के मुताबिक इस डाकघर में स्वाति साहू, शीतल पदाम सहित कुछ लोगों की नियुक्ति हुई है।

20 महिला डाकघरों का होना है निर्माण

अधीक्षक पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि पूरे प्रदेश में 20 डाकघर खोले जाने हैं। जहां कर्मचारी भी महिलाएं ही होंगी।

गुना में भी हुआ डाकघर का शुभारंभ

बता दें कि गुना में महिला डाकघर का शुभारम्भ एस डी एम शिवानी गर्ग द्वारा किया गया। जहां उन्होंने कहा कि महिला हर कार्य कर सकती है तो डाकघर क्यों नहीं चला सकती। इसलिए इसका निर्माण किया जा रहा है

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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