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वन विभाग की सख्ती से धाबा मार्ग पर अवैध सागौन की तस्करी का पर्दाफाश, वाहन छोड़कर फरार हुआ आरोपी

Written by:Amit Sengar
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सुरक्षा श्रमिकों का भी इस कार्रवाई में विशेष योगदान रहा। वन विभाग द्वारा तस्करी से संबंधित इस मामले की विवेचना जारी है, और फरार आरोपी की तलाश की जा रही है।
वन विभाग की सख्ती से धाबा मार्ग पर अवैध सागौन की तस्करी का पर्दाफाश, वाहन छोड़कर फरार हुआ आरोपी

Betul News : वन विभाग की सख्त निगरानी के बावजूद भी बैतूल के दक्षिण वनमंडल के अंतर्गत अवैध सागौन लकड़ी की तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है। वनमंडलाधिकारी विजयानन्थम टी. आर. के मार्गदर्शन और उपवनमंडलाधिकारी भैंसदेही (सा.) देवानन्द पाण्डेय के निर्देशन में वन परिक्षेत्र सावलमेंढा के परिक्षेत्र सहायक वृत्त धाबा के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई।

मिली जानकारी के अनुसार, धाबा से लामघाटी मार्ग तथा जनोना बेरियर पर रात्रि गश्ती के दौरान परतवाड़ा से धाबा की ओर आने वाले एक दोपहिया वाहन को जांच के लिए रोका गया। पूछताछ में सवारियों द्वारा संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर गहन जांच की गई, जिसके दौरान वाहन में सवार शोएब पिता शकील खान निवासी चिचढाना के मोबाइल पर संदिग्ध मैसेज आते देख टीम को शक हुआ। टीम ने तत्परता दिखाते हुए रात के 1:30 बजे परतवाड़ा की ओर से आ रहे एक संदिग्ध वाहन को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वाहन तेजी से बेरियर से आगे बढ़ गया।

गश्ती टीम द्वारा उसका पीछा करने पर लगभग 600 मीटर आगे वाहन को संदिग्ध हालत में छोड़कर चालक मौके से फरार हो गया। तलाशी लेने पर वाहन से 8 नग अवैध सागौन चरपट (0.318 घनमीटर) बरामद की गई। इस सागौन लकड़ी की अनुमानित कीमत लगभग 19,716 रु है। वाहन की पहचान मारुति सुजुकी वेगनआर (डीएल-8-सीएनबी-5359) के रूप में की गई।

आरोपी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया और अवैध सागौन को जब्त कर वन परिक्षेत्र सावलमेंढा के परिसर में लाया गया। पूरी कार्यवाही के दौरान वन विभाग की गश्ती टीम, जिसमें परिक्षेत्र अधिकारी मानसिंग परते, वनपाल देवीराम उईके, वनरक्षक आनंद मालवीय, और चेकिंग प्रभारी रमेश कवडे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरक्षा श्रमिकों का भी इस कार्रवाई में विशेष योगदान रहा। वन विभाग द्वारा तस्करी से संबंधित इस मामले की विवेचना जारी है, और फरार आरोपी की तलाश की जा रही है।

बैतूल से वाजिद खान की रिपोर्ट

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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।” View all posts by Amit Sengar
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