दुकानदार ने सोशल डिस्टेंस का पालन कराने निकाला अनोखा तरीका, छाता लेकर अंदर जा रहे ग्राहक

दुकानदार ने सोशल डिस्टेंस का पालन कराने निकाला अनोखा तरीका, छाता लेकर अंदर जा रहे ग्राहक

बैतूल/वाजिद खान

बैतूल में 5 मई से प्रशासन ने लॉकडाउन में छूट देते हुए दुकानदारों और आम लोगो को राहत दी है। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना करवाना सबसे जरूरी है। इसके लिए यहां एक दुकानदार ने अनोखा तरीका अपनाया है। दुकान में घुसने से पहले यहां खरीददार को सेनेटाइज तो किया ही जाता है, एक दूसरे से दूरी बनाए रखने के लिए छाते का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।

जी हाँ ठीक सुना आपने, बैतूल के प्रमुख व्यवसायिक क्षेत्र कोठीबाजार के सीमेंट रोड पर  जैसे ही व्यवसायिक प्रतिष्ठान खुले, छाते थामे खरीदारों की यह तस्वीर जिसने देखी वो पहले तो हैरान रह गया लेकिन जब माजरा समझ आया तो हर किसी ने इसकी सराहना की। यहां इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की दुकान चलाने वाले मोइज बोहरा ने यह अनोखा तरीका अपनाया है। उन्होंने दुकान के बाहर पांच छाते रख दिये हैं। जैसे ही कोई ग्राहक आता है उसे सबसे पहले सेनेटाइजर से हाथों को सेनेटाइज किया जाता है और फिर दुकान में प्रवेश के पहले हाथ में छाता खोलकर पकड़ा दिया जाता है। इससे दो ग्राहकों के बीच एक मीटर से ज्यादा की दूरी हो जाती है, जो सोशल डिस्टेंसिंग के लिए जरूरी होती है। उनके इस अनोखे तरीके को ग्राहक भी मान रहे है और सराह भी रहे हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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