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कृषि भूमि का नामांतरण करने पटवारी ने किसान से मांगी रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने घर के बाहर पटवारी को रंगे हाथ पकड़ा

खेत की जमीन का नामांतरण के लिए पटवारी किसान को तीन महीने से परेशान कर रहा था और रिश्वत मांग रहा था, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ा।
Patwari caught red-handed accepting bribe in Bhind

Patwari caught red-handed accepting bribe in Bhind

ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस ने भिंड जिले के एक पटवारी को किसान से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है,  किसान की कृषि भूमि के नामांतरण के बदले पटवारी रिश्वत की मांग कर रहा था, किसान ने इसकी शिकायत ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय में की जिसके बाद टीम ने पटवारी को रंगे हाथ दबोच लिया

ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक निरंजन शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि भिंड जिले की मेहगांव तहसील के ग्राम सरसेड में रहने वाले किसान राघवेंद्र बघेल ने पिछले दिनों एक शिकायती आवेदन दिया था जिसमें सिमार हल्के पर पदस्थ पटवारी संजय बघेल पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाये थे।

किसान राघवेंद्र बघेल ने बताया कि उसने पिछले दिनों उसने अपनी पत्नी आरती बघेल के नाम से एक कृषि भूमि (खेत) खरीदा था जिसका नामांतरण कराने के लिए उसने तहसील में आवेदन दिया था, वहां पदस्थ हल्का पटवारी संजय बघेल पहले तो फ़ाइल को टालते रहे फिर उन्होंने 30000/- रुपये की मांग की उसने देने से इंकार किया तो उन्होंने फ़ाइल लौटा दी।

खेत की जमीन के नामांतरण के लिए तीन महीने से कर रहा था परेशान 

राघवेन्द्र ने बताया कि वो फिर गया और नामांतरण करने का अनुरोध किया और कहा कि नियम में इतने पैसे लगते ही नहीं हैं फिर आप क्यों मांग रहे हो, उसके बाद वे 10000/- रुपये में नामांतरण करने के लिए तैयार हो गए, लेकिन वो पटवारी को रिश्वत नहीं देना चाहता, शिकायत की लोकायुक्त पुलिस ने जांच की तो आरोप सही निकले।

जैसे ही रिश्वत हाथ में आई, लोकायुक्त टीम ने दबोचा 

रिश्वत मांगे जाने के प्रमाण मिलने पर आज ट्रैप प्लान की गई, ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस की टीम पटवारी द्वारा बताये उसके घर के पास भिंड पहुंची, टीम ने रिश्वत की पहली क़िस्त के रूप में 5000 /- रुपये लेकर फरियादी किसान राघवेंद्र बघेल को पटवारी संजय बघेल के पास पहुंचाया और उसने जैसे ही रिश्वत की राशि दी उसे रंगे हाथ दबोच लिया।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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