मप्र में 1 जून से नहीं चलेंगी 35,000 यात्री बसें, यह है कारण

मप्र में 1 जून से नहीं चलेंगी 35,000 यात्री बसें, यह है कारण

भोपाल| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कोरोना (Corona) संक्रमण के चलते बस सेवा (Bus Service) बंद है, बस सेवा शुरू करने की तैयारी है| इस बीच प्राइम रूट बस आनंर्स एसोसिएशन ने प्रदेश की सभी 35,000 यात्री बसों का संचालन 1 जून से आगामी आदेश तक बंद रखने का निर्णय लिया है|

प्राइम रूट बस आनंर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद शर्मा एवं महामंत्री सुशील अरोरा ने कहा कि भारत मे करोना के प्रकोप पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है इस कारण सोशल डिस्टेंसिंग के कारण बसों का संचालन ग्रीन जोन एवं यलो जोन में भी नहीं हो पाएगा इसलिए यात्रियों की सुरक्षा एवं हमारे स्टाफ की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए बसों का संचालन बंद रखेंगे।

बस संचालको ने कहा कि मध्य प्रदेश की सरकार प्रदेश मे तीन माह अप्रैल-मई एवं जून से बंद बसों का एवं अन्य गाड़ियों का टैक्स माफ नहीं कर रही है इस संबंध में प्रदेश के 54 जिला यूनियनों ने अपने-अपने स्तर पर प्रशासन को ज्ञापन देकर टैक्स में छूट की मांग की है परंतु मध्य प्रदेश की सरकार मौन बैठी है| मोटर मालिको की प्रदेश कार्यकारिणी के निर्णय अनुसार जब तक सरकार बसों का टैक्स माफ नहीं करेगी बस वाले अपना संचालन पूर्ण रूप से बंद रखेंगे

यह हैं मांगें
-लाकडाउन अवधि मै संचालन बंद सभी बसो का टेकस शून्य किया जाऐ

-लाक डाउन समाप्त होने के पश्चात बसो के संचालन की निती का शासन स्पष्टीकरण देवे

-सोशल डिसटेंस निती मै बसो का संचालन पर शासन मोटर मालिकों सै प्रदेश स्तर पर चर्चा करे

-तीन माह में बसो के बंद संचालन अवधि मै बेरोजगार कर्मचारियों को 5 हजार रू प्रतिमाह भत्ता देवे.

-मध्यप्रदेश के सभी बस स्टैंड का कोविड..19 के तहत सुधार करे

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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