भोपाल में सामने आया यह बड़ा निवेश घोटाला अब पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों को कम समय में पैसा दोगुना करने, हर महीने मोटा ब्याज देने और रोजगार उपलब्ध कराने का सपना दिखाया गया। हजारों परिवारों ने अपनी मेहनत की कमाई इस उम्मीद में जमा कर दी कि कुछ सालों बाद उन्हें अच्छा फायदा मिलेगा। लेकिन जब पैसा वापस लेने का समय आया, तब लोगों के हाथ निराशा लगी।
इस मामले में अब मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच में सामने आया कि भोपाल की एक क्रेडिट कोऑपरेटिव संस्था ने करीब 3 हजार लोगों से एक करोड़ 64 लाख रुपये जमा कराए और बाद में पैसा लौटाने से इनकार कर दिया। इस घटना ने उन लोगों को झकझोर दिया है जिन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई, शादी या भविष्य के लिए पैसा निवेश किया था।
भोपाल में कैसे हुआ करोड़ों रुपये का निवेश घोटाला?
भोपाल में यह मामला वीएसीएल जन सहयोग क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड से जुड़ा हुआ है। संस्था लोगों को अलग-अलग बचत योजनाओं और फिक्स डिपॉजिट स्कीम में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करती थी। निवेशकों से कहा जाता था कि यहां पैसा जमा करने पर उन्हें बैंक से ज्यादा ब्याज मिलेगा। कई लोगों को यह भी बताया गया कि उनकी रकम कुछ ही वर्षों में दोगुनी हो जाएगी।
धीरे-धीरे संस्था ने लोगों का भरोसा जीत लिया। गांवों, कस्बों और शहरों में एजेंट भेजे गए। एजेंट घर-घर जाकर लोगों को योजनाओं की जानकारी देते थे। कई जगह छोटे कार्यक्रम और मीटिंग भी आयोजित की गईं, जहां लोगों को निवेश के फायदे बताए गए। आम लोगों को भरोसा दिलाने के लिए संस्था की ओर से दस्तावेज और सर्टिफिकेट भी दिए जाते थे।
12 प्रतिशत ब्याज और पैसा दोगुना करने का दिया गया लालच
जांच में सामने आया कि संस्था लोगों को 12 प्रतिशत तक ब्याज देने का दावा करती थी। कई निवेशकों को कहा गया कि अगर वे ज्यादा रकम जमा करेंगे तो उन्हें और अधिक फायदा मिलेगा। यही लालच धीरे-धीरे बड़े घोटाले में बदल गया।
संस्था निवेशकों को जन सहयोग कैश क्रेडिट सर्टिफिकेट जारी करती थी। इन सर्टिफिकेट में जमा की गई रकम, ब्याज दर, मैच्योरिटी डेट और मिलने वाली राशि का पूरा विवरण लिखा होता था। लोगों को लगता था कि सब कुछ कानूनी तरीके से हो रहा है।
EOW की जांच में क्या सामने आया?
भोपाल निवेश ठगी मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निवारण युवा मंच के संयोजक अशोक कुमार टाटा ने की थी। शिकायत मिलने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा की हबीबगंज शाखा से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए। इसमें पता चला कि संस्था के खाते में निवेशकों द्वारा करीब एक करोड़ 64 लाख रुपये जमा कराए गए थे। जांच एजेंसियों ने बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेज और निवेशकों के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया।
किन-किन लोगों पर दर्ज हुई FIR?
इस बड़े निवेश घोटाले में संस्था के कई पदाधिकारियों और सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। EOW ने संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा सहित कुल 14 लोगों को आरोपी बनाया है।
एफआईआर में जिन लोगों के नाम शामिल हैं उनमें उपाध्यक्ष बीएस चौहान, अभिषेक शर्मा, संचालक इंद्रेश सिंह, धीरज पवार, जितेंद्र सिंह, राकेश मालवीय, विकास गजभिए, चिरौंजी लाल मीणा, श्वेता शर्मा और संध्या सिंह शामिल हैं।






