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भोपाल मेट्रो में ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ योजना पर उमंग सिंघार ने MP सरकार को घेरा, कहा “बंदर के हाथ में उस्तरा”

Written by:Shruty Kushwaha
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मेट्रो परियोजनाएं शहरों में तेज, सुरक्षित और सुलभ सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए बनाई जाती हैं ताकि ट्रैफिक कम हो, प्रदूषण घटे और लोगों की रोजमर्रा की यात्रा आसान बन सके। लेकिन मौजूदा विवाद में कांग्रेस का आरोप है कि इन मूल उद्देश्यों से हटकर मेट्रो को निजी आयोजनों और पार्टी जैसे उपयोग के लिए खोला जा रहा है।
भोपाल मेट्रो में ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ योजना पर उमंग सिंघार ने MP सरकार को घेरा, कहा “बंदर के हाथ में उस्तरा”

Umang Singhar

मध्यप्रदेश में मेट्रो संचालन से जुड़ी नई ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ नीति को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस फैसले का विरोध करते हुए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “ऐसा लग रहा है जैसे ‘बंदर के हाथ में उस्तरा’ दे दिया गया हो।”

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को बेहतर कनेक्टिविटी, सड़क सुधार और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के उपयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन इसके बजाय मेट्रो को “प्रदर्शनी” में बदला जा रहा है। कांग्रेस नेता ने इसे जनता के पैसे के दुरुपयोग बताते हुए चिंता ज़ाहिर की है।

भोपाल मेट्रो में ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ 

मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने नई नीति शुरू की है जिसके तहत मेट्रो कोच में जन्मदिन मनाने, प्री-वेडिंग शूटिंग, फिल्म शूटिंग और अन्य कार्यक्रमों की अनुमति दी गई है। इस ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ योजना के तहत खड़ी हुई मेट्रो कोच के लिए 5,000 प्रति घंटा और चलती मेट्रो कोच के लिए 7,000 प्रति घंटा किराया तय किया गया है। एक कोच में अधिकतम 50 लोगों को अनुमति होगी और 20,000 रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा करना होगा। मेट्रो प्राधिकरण का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य नॉन-फेयर रेवेन्यू बढ़ाना, इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग करना और मेट्रो को लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जोड़ना है। ये भी कहा गया है कि ऐसे कार्यक्रम के दौरान सामान्य यात्री सेवाएं प्रभावित नहीं होंगीं।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

कांग्रेस इस फैसले को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े कर रही है। उमंग सिंघार ने ने कटाक्ष करते हुए कहा कि “सच में बंदर के हाथ में उस्तरा दे दिया गया है। मैं हंसूं या चिंता जताऊं, समझ नहीं आ रहा।” नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार न तो ठीक से सरकार चला पा रही है और न ही मेट्रो को। उन्होंने सवाल किया कि “जहां दूसरे देशों और कई राज्यों में मेट्रो में फोटो-रील लेना प्रतिबंधित है, वहां मध्यप्रदेश में सरकारी सुविधा को फोटो शूट के लिए किराए पर दिया जा रहा है। क्या यह मजाक है?”

उमंग सिंघार ने कहा है कि सरकार को बेहतर कनेक्टिविटी, अच्छी सड़कें और जनता को पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने के लिए जागरूक करने पर ध्यान देना चाहिए न कि मेट्रो को ‘प्रदर्शनी’ बनाने पर। कांग्रेस नेता ने इसे जनता के खून-पसीने की कमाई का दुरुपयोग करार दिया है।

घाटे में चल रही है भोपाल मेट्रो 

बता दें कि भोपाल मेट्रो भारी घाटे में चल रही है। मेट्रो प्राधिकरण के आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भोपाल मेट्रो का दैनिक संचालन खर्च लगभग 8 लाख रुपये है, जबकि दैनिक कमाई सिर्फ 15 हजार से 20 हजार रुपये के बीच है। यानी मेट्रो अपने परिचालन लागत का सिर्फ 5 प्रतिशत ही वसूल कर पा रही है। कम यात्री संख्या के कारण ट्रेनें अक्सर खाली चल रही हैं और कई बार फेरे भी घटाए जा चुके हैं। इस स्थिति के बाद अब सरकार ने ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ नीति लागू कर दी है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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