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रहवासी इलाकों में कारोबार को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, पिछले 22 दिनों से सीलिंग अभियान ठप

भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबारों को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। दरअसल रहवासियों की आपत्तियों के बीच आने वाला फैसला शहर के हजारों व्यापारियों और स्थानीय लोगों पर सीधा असर डाल सकता है।
रहवासी इलाकों में कारोबार को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, पिछले 22 दिनों से सीलिंग अभियान ठप

भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबारों का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दरअसल मंगलवार को इस मामले में होने वाली सुनवाई पर शहर के 62500 से ज्यादा प्रतिष्ठानों की नजर टिकी है। इससे पहले 15 सितंबर को सुनवाई टल गई थी लेकिन अब नगर निगम और याचिकाकर्ता दोनों अपने-अपने दस्तावेजों के साथ अदालत में पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि इस सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।

बता दें कि यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के बाद और तेज हुआ था। इसके बाद नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में चल रहे कारोबारों की पहचान कर नोटिस जारी करना शुरू किया था। कार्रवाई के दौरान हजारों प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए और कुछ दुकानों को सील भी किया गया लेकिन विरोध के बाद अभियान रोक दिया गया।

करीब 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया

वहीं नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में करीब 62500 ऐसे प्रतिष्ठानों की सूची तैयार की गई थी जो रहवासी इलाकों में संचालित हो रहे थे। शुरुआती चरण में इनमें से 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद तीन दिनों तक कार्रवाई चलाते हुए करीब 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया। हालांकि व्यापारियों के विरोध प्रदर्शन के बाद निगम ने आगे की कार्रवाई रोक दी। पिछले करीब 22 दिनों से सीलिंग अभियान ठप पड़ा है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई यह तय कर सकती है कि नगर निगम आगे नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई जारी रखेगा या फिर किसी नई व्यवस्था के तहत मामला आगे बढ़ेगा। वहीं नगर निगम के अधिकारियों ने सोमवार को पूरे दिन कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट तैयार की। इसमें नोटिस, सीलिंग और पालन से जुड़े रिकॉर्ड शामिल किए गए हैं। निगम अदालत के सामने यह बताने की तैयारी में है कि उसने कोर्ट के आदेश के बाद क्या-क्या कदम उठाए।

कोर्ट में रखे जाएंगे दस्तावेज

दरअसल इस मामले में रहवासियों और व्यापारियों के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि कोर्ट में एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। उनके मुताबिक जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था उनमें से कई दोबारा खुल गए हैं और इसका सबूत देने के लिए फोटो और वीडियो भी अदालत में पेश किए जाएंगे। वहीं दूसरी ओर व्यापारी पहले ही निगम की कार्रवाई का विरोध कर चुके हैं। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त तैयारी के बड़े पैमाने पर नोटिस और सीलिंग से कारोबार प्रभावित हुआ। इसी विरोध के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी थी। अब दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट में अपने-अपने तर्क रखेंगे।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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