बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरु किया गया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और ये सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य मतदाता छूट न जाए।
वोटर लिस्ट रिविजन और फॉर्म भरने के दौरान कई तरह की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक कहीं बीएलओ खेत में बैठकर फॉर्म भर रहे थे तो कहीं एक ही ईपिक पर तीन नाम दर्ज पाए गए। अब इन अनियमितताओं को लेकर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सवाल किए हैं।
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बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है, ताकि योग्य भारतीय नागरिक ही मतदान कर सकें। यह प्रक्रिया 25 जून से शुरू हो चुकी है और 30 सितंबर तक चलेगी। बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र भरने में सहायता कर रहे हैं। पूरी प्रक्रिया के बाद बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। हालांकि, इस दौरान अखबारों में कई तरह की अनियमितताओं की खबरें भी सामने आई हैं।
कमलनाथ ने लगाए आरोप
इसे लेकर अब कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम मजाक बनकर रह गया है। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ‘खेत में फॉर्म भरवाने और व्हाट्सएप पर पहचान कराने की खबर लोकतंत्र पर गंभीर खतरे की ओर इंगित करती है। अफसोस की बात यह है कि यह सब उसी चुनाव आयोग के संरक्षण में हो रहा है, जिसकी ज़िम्मेदारी निष्पक्ष निर्वाचन की है।’ उन्होंने सवाल किया कि इस स्थिति में जनता और विपक्षी दल शिकायत भी करें तो किससे करें। उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ प्रतिनिधि से लेकर चुनाव आयोग तक चुनाव में धांधली की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है कि ‘मैं तमाम संबंधितों से अनुरोध करता हूँ कि लोकतांत्रिक मूल्यों के पतन का कारण नहीं बनें और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाकर खोए हुए विश्वास को पुनः स्थापित करने की दिशा मे कदम उठाएं।’