सीएम शिवराज ने दिए ये निर्देश, क्वारंटाइन सेंटर पर इस तरह बढ़ाएंगे लोगों का मनोबल

सीएम शिवराज ने दिए ये निर्देश, क्वारंटाइन सेंटर पर इस तरह बढ़ाएंगे लोगों का मनोबल

भोपाल

कोरोना जैसी भयानक बीमारी से आज पूरे देश भर में 42 हजार से ज्यादा लोग जूझ रहे हैं, वहीं मध्यप्रदेश की स्थिति की बात करें तो वो भी दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। संक्रमित मरीजों के आकंडे हर दिन तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में जो लोग संक्रमित हो रहे हैं या क्वारंटाइन सेंटरों में हैं उनका मनोबल और हिम्मत धीरे-धीरे जवाब देने लगी है। ऐसे लोगों का मनोबल ना टूटे इसके लिए सरकार ने बेहद अनोखी पहल की है। अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए हैं कि क्वारंटाइन सेंटरों में रहने वाले लोगों का हौंसला बनाए रखने के लिए वहां मनोरंजन का इंतजाम किया जाए। जिसके बाद अब इन सेंटरों में मनोरंजन के साधनों से लोगों के लिए कई एक्टिविटी का आयोजन किया जाएगा क्योंकि कई अन्य स्थानों पर कोरोना जैसी महामारी से जीतने के लिए इस तरह के आयोजन बेहद कारगर सिद्ध हो रहे हैं।

इस अनोखी पहल के तहत लोगों के मनोरंजन के लिए धार्मिक और सांस्कृतिंक आयोजन के साथ-साथ उन्हें ऐसे साधन उपलब्ध कराए जाएंगे जिससे वहां रहने वाले लोगों को घर जैसा माहौल मिले सकेगा और वो डिप्रेशन व तनाव से मुक्त हो पाएंगें। इसी के तहत भोपाल के राजीव गाँधी प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय में बने क्वारंटाइन सेंटर में लोगों के लिए हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। साथ ही रोजाना सजावट और लैंडमार्क गार्डन में भजन संध्या और रामायण पाठ का आयोजन भी किया जा रहा है। इतना ही नहीं इन सेंटरों में क्वारंटाइन किए गए लोगों को रोज फिल्में भी दिखाई जा रही हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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