VIDEO: शिवराज बोले, अभी मैं ‘टेंपरेरी मुख्यमंत्री’, परमानेंट तब होऊंगा जब…

chiefminister shivraj singh chouhan

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश का उपचुनाव रोचक हो चल है, भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल पूरी ताकत झोंकने को तैयार है| भाजपा जहां सत्ता बचाने पूरा जोर लगा रही है तो वहीं कांग्रेस को सत्ता वापसी की उम्मीद है| इस बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद टेम्परेरी सीएम बताया है|

मंदसौर जिले की सुवासरा विधानसभा क्षेत्र के सीतामऊ में सभा को सम्बोधित करते हुए सीएम शिवराज ने कहा कि मैं अभी टेम्परेरी मुख्यमंत्री हु| जनता से उन्होंने अपील की कि जब हरदीप सिंह को जिताएंगे तभी वह परमानेंट हो पाएंगे| सीएम सुवासरा विधान सभा सीट पर हरदीप सिंह डंग के समर्थन में एक जनसभा कर रहे थे| इस दौरान उन्होंने कमलनाथ पर जमकर हमला बोला|

कमलनाथ पर बोला हमला
कमलनाथ पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा-तेरी प्यारी प्यारी सूरत को किसी की नज़र न लगे। उन्होंने कहा कि जब बाढ़ आई थी तब कमलनाथ जी से कहा था कि चलो मंदसौर तब उन्होंने कहा थाकि हम यही से देख लेंगे, तब हमने धरना दिया और फिर आना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता ही अपनी जिंदगी है। मैं मुख्यमंत्री रहते हुए भी और नहीं रहते हुए भी, जनता के बीच ही रहा, लेकिन कमलनाथ जी तो वल्लभ भवन से बाहर निकलने को ही तैयार नहीं हुए। बाढ़ के दौरान भी वे जनता के बीच नहीं आये और राहत की राशि भी खा गये। कांग्रेस ने दस दिन में कर्ज माफी का वादा किया और बाद में लाल-पीले फार्म बांटकर ज्यादातर किसानों को कर्ज माफी के अयोग्य बता दिया। जिनका कर्जा माफ किया, उन्हें भी झूठे प्रमाण पत्र बांट दिये, अब बैंक वो पैसा मुझसे मांग रहे हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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