
भोपाल।
कांग्रेस विधायक व आदिवासी नेता हीरा लाल अलावा ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी के फैसले का विरोध किया। अलावा ने कमलनाथ सरकार के आदिवासी इलाकों में निजी कंपनियों को खदान दिए जाने का विरोध किया है। उन्होंने ट्वीटर के माध्यम से विरोध जताया है। हालांकि अभी तक इस पर किसी भी कांग्रेस नेता या मंत्री की प्रतिक्रिया सामने नही आई है।
खबर है कि प्रदेश में आय़ बढा़ने के लिए कमलनाथ सरकार झाबुआ जिले की रॉक फास्फेट खदान ( मेघनगर ) को निजी हाथो मे देने की तैयारी कर रही है।हालांकि इसको लेकर सरकार की तरफ से कोई अधिकारिक पुष्टि नही की गई है। लेकिन इसके पहले ही कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने इस फैसले का विरोध कर दिया है।अलावा का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में संसाधनों पर पहला हक आदिवासियों का है, अगर ऐसा होगा तो आदिवासी और उनके इलाके के साथ ठीक नही होगा। अलावा ने अपने बयान में सुप्रीमकोर्ट के फैसले का हवाला भी दिया है।हालांकि इस संबंध में सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नही दी है। बता दे कि अलावा पहले भी सरकार के कई फैसलों का खुलकर विरोध कर चुके है। वही वे मंत्री बनाने को लेकर भी परिणाम भुगतने जैसी धमकी सरकार को कई बार धमकी दे चुके है।
वही उन्होंने हाल ही में गुजरात के मोरबी में मारे गए झाबुआ के मजदूरों को मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने लिखा है कि मोरवी हादसे में मारे गए श्रमिकों को एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए ।
आदिवासी क्षेत्रों में संसाधनों पर पहला हक आदिवासियों का है यह बात सुप्रीम कोर्ट अपने निर्णय में कह चुकी है ऐसे आदिवासी इलाकों में निजी कंपनियों को खदाने देना उचित नही है https://t.co/mmfVpiyqG9
— JAYS INDIA (@HIRA_ALAWA) August 11, 2019

