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भोपाल-फैटी लिवर फ्री स्क्रीनिंग, पहले दिन ही 2 हजार से ज्यादा का चेकअप

Written by:Sushma Bhardwaj
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बीएमआई 23 से अधिक होने, महिलाओं में कमर का माप 80 सेमी और पुरुषों में 90 सेमी से अधिक होने पर आयुष्मान आरोग्य मंदिरों एवं नजदीकी स्वास्थ्य संस्थाओं में जांच के लिए रेफरल किया जा रहा है।
भोपाल-फैटी लिवर फ्री स्क्रीनिंग, पहले दिन ही 2 हजार से ज्यादा का चेकअप

नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज की स्क्रीनिंग के लिए चलाये जा रहे स्वस्थ लीवर मिशन के पहले दिन 2191 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। कार्यक्रम में 30 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों की स्क्रीनिंग जा रही है। स्क्रीनिंग में ऊंचाई, वजन, कमर के माप की गणना की जा रही है। फैटी लीवर के संभावित संदिग्ध श्रेणी के मरीजों की जानकारी संधारित की जा रही है। इन लोगों में चिकित्सकीय सलाह पर अन्य जांचों के माध्यम से फैटी लीवर होने की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा।

लिवर की बीमारियों का आसानी से लगाया जाता है पता 

ये अभियान लीवर संबंधी बीमारियों की जागरुकता, प्रारंभिक पहचान, उपचार और रोकथाम के लिए चलाया जा रहा है। मिशन के तहत प्रारम्भिक स्क्रीनिंग में मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा बीएमआई , सीबैक स्कोर एवं कमर का माप लिया जा रहा है। बीएमआई 23 से अधिक होने, महिलाओं में कमर का माप 80 सेमी और पुरुषों में 90 सेमी से अधिक होने पर आयुष्मान आरोग्य मंदिरों एवं नजदीकी स्वास्थ्य संस्थाओं में जांच के लिए रेफरल किया जा रहा है। अभियान के पहले दिन 1978 व्यक्तियों की बी एम आई स्क्रीनिंग में 565 का बीएमआई अधिक पाया गया। 867 पुरुषों की स्क्रीनिंग में 211 और 1324 महिलाओं में से 407 की कमर का माप निर्धारित मापदंडों से अधिक मिला है।

लीवर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता

स्वस्थ लीवर मिशन में जोखिम कारकों की पहचान और मूल्यांकन , लीवर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता , संदिग्ध और पुष्ट मामलों के लिए रेफरल और फॉलोअप , चिकित्सकों व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण सम्मिलित है । संदिग्ध मामलों की जांच के साथ साथ लीवर को स्वस्थ रखने के लिए घर में उपलब्ध पौष्टिक आहार के सेवन, शराब एवं धूम्रपान से दूर रहने का परामर्श दिया जा रहा है।

प्रमुख जन स्वास्थ्य समस्या

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज एक प्रमुख जन स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रही है जो कि मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप एवं मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसे बीमारियों से संबंधित है। समय पर पहचान कर प्रबंधन और जोखिम कारकों को कम किया जा सकता है।

Sushma Bhardwaj
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