इंदौर दूषित पेयजल मामला: ADB से लिए 5,000 करोड़ कर्ज के बावजूद जल आपूर्ति व्यवस्था विफल, उमंग सिंघार ने सरकार पर लगाए आरोप

इंदौर की घटना के बाद शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इतना भारी भरकम कर्ज जल आपूर्ति, स्वच्छता और सीवरेज सुधार के लिए लिया, लेकिन इसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि ADB की समीक्षा रिपोर्ट और CAG की ऑडिट रिपोर्ट पहले ही कम जल उपलब्धता, जर्जर पाइपलाइन, अधूरी परियोजनाओं और कमजोर रखरखाव जैसी खामियों की पुष्टि कर चुकी हैं।
Umang Singhar Opposition Leader

Umang Singhar

इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश की जल प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भागीरथपुरा इलाके में हुई त्रासदी की गूंज देशभर में सुनाई दे रही है। इसे लेकर कांग्रेस लगातार सरकार से सवाल कर रही है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2004 से 2020 के बीच शहरों में पेयजल, स्वच्छता और सीवरेज सुधार के नाम पर एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से लगभग 5,000 करोड़ का कर्ज लिया, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बदतर बने हुए हैं।

उन्होंने भागीरथपुरा घटना को भाजपा सरकार की लंबी अनदेखी और विफलता का नतीजा बताया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एडीबी से शहरी जल आपूर्ति और स्वच्छता के लिए लिए गए करोड़ों रुपये के लोन का सही उपयोग नहीं हुआ, जिसके चलते यह त्रासदी हुई।

उमंग सिंघार ने सरकार पर लगाए आरोप

मध्यप्रदेश में शहरी जल आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 से 2020 के बीच एशियन डेवलपमेंट बैंक  से लिए गए लगभग 5,000 करोड़ रुपये के लोन का उद्देश्य शहरी जल आपूर्ति, स्वच्छता और सीवरेज सुधारना था..लेकिन परियोजनाएं अधर में लटक गईं जिससे आज यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों के लिए होना था। इसके तहत प्रति व्यक्ति पेयजल उपलब्धता बढ़ाना, गुणवत्ता सुधारना, जलजनित रोग कम करना और टिकाऊ जल संस्थान बनाने का उद्देश्य था लेकिन सरकार इसमें विफल रही।

रिपोर्ट्स के हवाले से सरकार को घेरा

कांग्रेस नेता ने कहा कि वर्ष 2016 में ADB द्वारा जारी “India: Urban Water Supply and Environmental Improvement in Madhya Pradesh Project” की समीक्षा रिपोर्ट में इन परियोजनाओं की गंभीर खामियां उजागर हुई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, भारी निवेश के बावजूद प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता केवल 31.5 लीटर प्रतिदिन (LPCD) रही, जबकि राष्ट्रीय न्यूनतम मानक 70 LPCD है। इससे स्पष्ट होता है कि बड़ी आबादी आज भी बुनियादी पेयजल सुविधा से वंचित है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई शहरों में पानी को शुद्ध करने के लिए केवल ब्लीचिंग पाउडर का सहारा लिया जा रहा है, क्योंकि कार्यशील जल शोधन संयंत्रों की कमी है। इससे जैविक प्रदूषण और जलजनित रोगों का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा, जर्जर और रिसाव वाली पाइपलाइनों के कारण भारी मात्रा में पानी की बर्बादी हो रही है और कई स्थानों पर सीवेज का दूषित पानी पेयजल लाइनों में मिल रहा है।

उमंग सिंघार ने कहा कि जल संरक्षण में कमी, जर्जर पाइपलाइन, अधूरा सीवरेज नेटवर्क और कमजोर संचालन व रखरखाव के कारण कई शहरों में पानी में मलमूत्र और सीवेज मिल रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि CAG ने भी वर्ष 2019 में भोपाल और इंदौर के जल प्रबंधन को लेकर अपनी ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं उजागर की थीं। नेता प्रतिपक्ष ने इंदौर में हुई मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि ये घटनाएं किसी “अप्रत्याशित दुर्घटना” का परिणाम नहीं हैं, बल्कि वर्षों से चली आ रही नीतिगत विफलताओं और लापरवाह शासन का नतीजा हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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