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जीतू पटवारी ने शिवराज सिंह चौहान को दिए सुझाव, कहा “किसानों को भाषण नहीं, कानूनी MSP और अन्य राहत चाहिए”

Written by:Shruty Kushwaha
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उन्होंने किसान आत्महत्याओं, बढ़ती खेती लागत, महंगे डीजल, खाद-बीज की कीमतों, एमएसपी और फसल बीमा योजना को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता ने कहा कि किसान अब “Minimum Support Price” नहीं बल्कि “Minimum Survival Price” मांगने की स्थिति में पहुंच गया है।
जीतू पटवारी ने शिवराज सिंह चौहान को दिए सुझाव, कहा “किसानों को भाषण नहीं, कानूनी MSP और अन्य राहत चाहिए”

Jitu Patwari

जीतू पटवारी ने किसानों के मुद्दों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरा है। उन्होंने “राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-खरीफ अभियान 2026” में कृषि मंत्री द्वारा दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब मंच से “अच्छे सुझाव देने” की बात कही गई है तो किसानों की वास्तविक समस्याओं पर गंभीरता से चर्चा होना जरूरी है।

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश में किसानों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने NCRB के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2024 में देशभर में 10,546 किसानों और कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की, जबकि 2023 में यह संख्या 10,786 रही थी। उन्होंने कहा कि औसतन हर घंटे एक किसान परिवार उजड़ रहा है और यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

जीतू पटवारी ने शिवराज सिंह चौहान को घेरा 

जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार पर किसानों की लगातार उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा की सत्ता किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय कर्ज-निर्भर बना रही है। उन्होंने “राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-खरीफ अभियान” में शिवराज सिंह चौहान के बयान का जवाब देते हुए कहा, “शिवराज सिंह जी ने कहा था कि अच्छे सुझाव दीजिए, मौनी बाबा मत बनिए। मैं केंद्रीय कृषि मंत्री जी के आग्रह का सम्मान करते हुए किसानों की समस्याओं पर प्रकाश डाल रहा हूं, उम्मीद है कि इन्हें सुझाव के रूप में लिया जाएगा।”

MSP बन गई Minimum Survival Price

जीतू पटवारी ने कहा कि आज देश और मध्यप्रदेश का किसान MSP (Minimum Support Price) की बजाय “Minimum Survival Price” मांगने को मजबूर हो गया है। स्वामीनाथन आयोग की C2+50% की सिफारिश को दरकिनार कर सरकार A2+FL फॉर्मूले पर काम कर रही है, जो किसानों को वास्तविक लागत से भी कम सुरक्षा देता है। MSP में होने वाली बढ़ोतरी महंगाई और लागत वृद्धि के मुकाबले बेहद कम है।

बढ़ती लागत और घटती आय

उन्होंने कहा कि डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने खेती की लागत को आसमान छू लिया है। खाद, बीज और कीटनाशकों की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन किसानों की आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय संकट और आयात पर निर्भरता के कारण उर्वरक महंगे हो गए हैं। केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी में भारी कटौती कर किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाला है।

प्राकृतिक आपदाएं, बेमौसम बारिश, सूखा और जल संकट किसानों की कमर तोड़ रहे हैं लेकिन मुआवजा ज्यादातर कागजों तक ही सीमित रह जाता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर भी सवाल उठ रहे हैं कि बीमा कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, जबकि किसान क्लेम लेने के लिए भटक रहे हैं।

छोटे किसानों की मजबूरी

कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत के 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास संकट झेलने की कोई आर्थिक क्षमता नहीं है। खेती की लागत बढ़ रही है, उपज के दाम नहीं बढ़ रहे, कर्ज बढ़ रहा है लेकिन मोदी सरकार के पास सिर्फ भाषण हैं। उन्होंने सवाल किया कि “अगर कृषि मंत्री सिर्फ मंचों से घोषणाएं करेंगे तो खेत में खड़ा किसान आखिर किससे न्याय मांगे?”

कांग्रेस की मांगें

जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार से पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • कानूनी गारंटी के साथ MSP
  • सस्ता डीजल
  • खाद-बीज पर राहत
  • समय पर उचित मुआवजा
  • लागत का सही दाम

उन्होंने कहा कि “मध्यप्रदेश सहित पूरे देश के किसान कर्ज, बढ़ती लागत, सिंचाई संकट और बाजार की लूट से परेशान हैं। किसानों को अब भाषण नहीं, ठोस समाधान चाहिए।”

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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