कांग्रेस ने मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार पर आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी द्वारा विधानसभा में खरगोन के क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय (KTBU) के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने जानकारी दी है कि यहां फिलहाल सभी शैक्षणिक पद रिक्त है। इसके बाद उमंग सिंघार ने सरकार को शिक्षा के मुद्दे पर घेरा है।
बता दें कि खरगोन जिले में स्थित क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय की स्थापना निमाड़ क्षेत्र के छात्रों को स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। विश्वविद्यालय का नाम आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी टंट्या भील के सम्मान में रखा गया है। इसका उद्घाटन मार्च 2024 में किया गया था लेकिन दो साल बाद भी यहां स्थायी रूप से कोई भी शैक्षणिक पद पर भर्ती नहीं की गई है।
विधानसभा में क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय को लेकर दी गई ये जानकारी
मध्यप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने सवाल किया था कि खरगोन जिले अंतर्गत क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय में कौन-कौन से विषय की शिक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने पूछा कि क्या वर्तमान में स्वीकृत सभी पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं और विश्वविद्यालय में कितने पद व्याख्याता के स्वीकृत हैं तथा कितने पदों पर वर्तमान में पदपूर्ति है।
इसके जवाब में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने जानकारी दी कि क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगोन में कृषि, कला, वाणिज्य (कम्प्यूटर), विज्ञान (कम्प्यूटर) तथा स्नातकोत्तर स्तर पर अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम संचालित है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। विश्वविद्यालय के लिये सहायक प्राध्यापक के 80 पद, सह प्राध्यापक के 40 पद तथा प्राध्यापक के 20 पद, कुल 140 शैक्षणिक पद स्वीकृत किये गये हैं। वर्तमान में सभी पद रिक्त हैं। पदपूर्ति की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
इसे लेकर अब कांग्रेस सरकार को घेर रही है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि इस विश्वविद्यालय में 140 प्रोफेसरों के पद पूरी तरह से खाली हैं, जिसके कारण हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। उन्होंने कहा कि ‘मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार का एक और अजूबा है कि ये विश्वविद्यालय बिना प्रोफेसरों के चल रहा है। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। आज हजारों विद्यार्थी यहाँ शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए 140 प्रोफेसरों के सभी पद खाली पड़े हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालय से 80 महाविद्यालय संबद्ध हैं, जहां विभिन्न स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं लेकिन सारे पद खाली पड़े हैं।’ कांग्रेस नेता ने सरकार पर आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकता के प्रति घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूछा है कि क्या आदिवासी युवाओं का भविष्य सरकार की प्राथमिकता नहीं है।






