भोपाल का चर्चित 90 डिग्री ब्रिज मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार वजह है मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला। सरकार ने इस मामले में सस्पेंड किए गए सात इंजीनियरों को फिर से बहाल कर दिया है। जैसे ही यह खबर सामने आई, प्रशासनिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा तेज हो गई। कई लोग इसे राहत का फैसला मान रहे हैं, तो कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जांच पूरी होने से पहले बहाली क्यों की गई।
यह मामला भोपाल के ऐशबाग इलाके में बने उस रेलवे ओवरब्रिज से जुड़ा है, जिसे लोग 90 डिग्री ब्रिज के नाम से जानते हैं। ब्रिज के डिजाइन और निर्माण को लेकर काफी विवाद हुआ था। लोगों का कहना था कि ब्रिज का मोड़ इतना तीखा है कि वहां हादसे हो सकते हैं। इसी विवाद के बाद सरकार ने कार्रवाई करते हुए कई इंजीनियरों को सस्पेंड किया था। अब करीब एक साल बाद इन इंजीनियरों की बहाली का आदेश जारी हुआ है।
क्या है भोपाल का 90 डिग्री ब्रिज मामला?
भोपाल के ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज को लेकर उस समय विवाद शुरू हुआ था, जब इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। लोगों ने दावा किया कि ब्रिज का मोड़ लगभग 90 डिग्री जैसा दिखाई दे रहा है। इसे लेकर सवाल उठे कि आखिर ऐसा डिजाइन कैसे पास हुआ।
इसके बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा। आम लोगों ने कहा कि अगर यहां तेज रफ्तार वाहन आएंगे तो दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। मामला बढ़ने के बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए थे।
जांच में यह सामने आया कि ब्रिज का वास्तविक एंगल 90 डिग्री नहीं बल्कि करीब 119 डिग्री था। हालांकि निर्माण के दौरान तकनीकी खामियों और सुपरविजन की कमी के कारण इसकी बनावट विवाद का कारण बन गई।
किन इंजीनियरों को किया गया था सस्पेंड?
90 डिग्री ब्रिज मामले में पीडब्ल्यूडी विभाग के कई इंजीनियरों पर कार्रवाई की गई थी। इनमें डिजाइन, निर्माण और सुपरविजन से जुड़े अधिकारी शामिल थे।
23 जून 2025 को जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया था, उनमें दो प्रभारी चीफ इंजीनियर भी शामिल थे। सरकार का कहना था कि निर्माण कार्य में लापरवाही और तकनीकी त्रुटियों की जांच जरूरी है। अब सरकार ने इन सात इंजीनियरों को बहाल करने का फैसला लिया है। बहाली के बाद इन्हें ईएनसी ऑफिस में पदस्थ किया जाएगा। हालांकि सभी अधिकारियों को पूरी तरह क्लीन चिट नहीं मिली है।
किन अधिकारियों पर जारी रहेगी जांच?
90 डिग्री ब्रिज मामले में जीपी वर्मा, रवि शुक्ला और उमाशंकर मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी। इन पर निर्माण में तकनीकी लापरवाही के आरोप हैं। जांच प्रक्रिया में 4 से 5 महीने लग सकते हैं।
किन इंजीनियरों को मिली राहत?
संजय खांडे, शबाना रज्जाक और शानुल सक्सेना को बिना विभागीय जांच के बहाल कर दिया गया है। विभाग के अनुसार जांच रिपोर्ट में डिजाइन संबंधी गलती की पुष्टि नहीं हुई।
जांच में क्या-क्या बातें सामने आईं?
तीन वरिष्ठ इंजीनियरों की जांच रिपोर्ट में कई अहम बातें सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार ब्रिज का एंगल 90 डिग्री नहीं था, लेकिन निर्माण के दौरान तकनीकी समन्वय सही तरीके से नहीं हो पाया।
जांच में यह भी कहा गया कि अगर निर्माण के समय बेहतर सुपरविजन होता, तो डिजाइन को और सुरक्षित बनाया जा सकता था। रिपोर्ट में रेलवे क्षेत्र में वाल टाइप पिलर बनाए जाने को भी गंभीर तकनीकी त्रुटि माना गया।






