शनि देव को हिंदू धर्म में न्याय के देवता और कर्मफल दाता कहा जाता है। मान्यता है कि इंसान जैसा कर्म करता है, शनि देव उसे वैसा ही फल देते हैं। यही वजह है कि शनिवार के दिन लाखों लोग शनि मंदिरों में जाकर तेल चढ़ाते हैं, पूजा करते हैं और अपनी परेशानियों से राहत की कामना करते हैं। लेकिन शनि पूजा में कुछ ऐसे नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। इनमें सबसे खास नियम है, तांबे के बर्तनों का उपयोग न करना।
अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि जब दूसरे देवी-देवताओं की पूजा में तांबे का लोटा शुभ माना जाता है, तो फिर शनि देव की पूजा में इसे वर्जित क्यों बताया गया है? आखिर तांबे और शनि देव के बीच ऐसा क्या संबंध है? इसके पीछे धर्म शास्त्र, ज्योतिष और पौराणिक मान्यताओं का गहरा संबंध बताया गया है।
शनि देव को क्यों कहा जाता है कर्मफल दाता?
हिंदू धर्म ग्रंथों में शनि देव को न्यायाधीश का दर्जा मिला है। मान्यता है कि शनि देव हर व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं। यही कारण है कि जब किसी व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चलती है, तो उसे जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं।
शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं, पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाते हैं और शनि मंदिर में जाकर पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर शनि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन की परेशानियां कम होने लगती हैं।
लेकिन शनि पूजा में नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी माना गया है। पूजा के दौरान कौन सी वस्तु इस्तेमाल करनी है और कौन सी नहीं, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। इसी में तांबे के बर्तन का नियम भी शामिल है।
शनि पूजा में तांबे के बर्तन क्यों माने जाते हैं अशुभ?
धर्म शास्त्रों के अनुसार तांबा सूर्य देव से जुड़ी धातु मानी जाती है। जब भी सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है, तो तांबे के लोटे का उपयोग सबसे शुभ माना जाता है। ज्योतिष में तांबा ऊर्जा, तेज और सूर्य के प्रभाव का प्रतीक माना जाता है।
वहीं दूसरी ओर शनि देव और सूर्य देव के संबंधों को लेकर पौराणिक कथाओं में मतभेद और शत्रुता का वर्णन मिलता है। शनि देव सूर्य के पुत्र जरूर हैं, लेकिन दोनों के बीच संबंध अच्छे नहीं बताए गए हैं। यही कारण है कि शनि पूजा में सूर्य से जुड़ी धातु यानी तांबे का उपयोग नहीं किया जाता।
मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तन का उपयोग करता है, तो इससे शनि देव नाराज हो सकते हैं। इसलिए शनिवार की पूजा में तांबे की बजाय लोहे या स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करना शुभ माना गया है।
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