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कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत? पूजा में इन नियमों का रखें ध्यान

Written by:Diksha Bhanupriy
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वट सावित्री व्रत पर बरगद की पूजा का महत्व माना गया है। चलिए आज हम आपको पूजा का मुहूर्त और इससे जुड़े कुछ जरूरी नियम बता देते हैं।
कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत? पूजा में इन नियमों का रखें ध्यान

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का बहुत महत्व माना गया है। यह सुहागन स्त्रियों का व्रत है जो वह अपने पति की लंबी आयु की कामना के साथ रखती हैं। इसी के साथ घर की सुख समृद्धि की प्रार्थना के लिए भी यह व्रत रखा जाता है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला ये व्रत बरगद वृक्ष की पूजा से जुड़ा हुआ है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ऐसा कहा जाता है कि वट वृक्ष में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास होता है। यही कारण है कि व्रत के दौरान बरगद की पूजा की जाती है। आज हम आपको पूजा के दौरान होने वाली कुछ ऐसी गलतियों के बारे में बताते हैं जो नहीं करनी चाहिए। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। चलिए इस व्रत से जुड़े नियमों को जान लेते हैं।

व्रत की तिथि और मुहूर्त

सबसे पहले तो आपको बता दें कि वट सावित्री व्रत 16 मई को किया जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त 4:07 से 4:48 तक रहेगा। विजय मुहूर्त का समय 2:04 से 3:28 तक रहने वाला है। इस दौरान पूजा पाठ और मांगलिक काम किए जा सकते हैं।

वट सावित्री व्रत पर ना करें ये गलती

वृक्ष को नुकसान

वट सावित्री व्रत पर अक्सर यह गलती देखने को मिलती है। वह है बरगद की टहनियों को तोड़ना। शास्त्रों के मुताबिक हम जिस वृक्ष की पूजा कर रहे हैं उसकी टहनी तोड़ना उसे चोट पहुंचाने के बराबर है। इससे व्यक्ति पाप का भागी बनता है। अगर आप घर पर पूजा कर रहे हैं तो छोटा सा पौधा लेकर आएं या फिर चित्र की पूजा कर लें, टहनी लेकर ना आएं।

सूत बांधने की दिशा

वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय कच्चा सूत या फिर कलावा बांधते हैं। इतना याद रखें की परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में करना चाहिए। विपरीत दिशा में घूमना अशुभ फल देने का काम करता है। आप दोष के भागी बन सकते हैं।

कथा ना सुनना

वट सावित्री व्रत का फल तभी मिलता है जब सावित्री और सत्यवान की कथा श्रद्धा के साथ सुनी जाती है। कथा के बीच में उठकर जाना या फिर कथा ना सुनने से संकल्प पूरा नहीं होता।

बिना दान दक्षिणा के आना

पूजा के बाद फल, वस्त्र और चने जैसी चीजों का दान करना जरूरी है। दान दक्षिणा करने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लें। इससे आपको पूजा का पूर्ण फल मिलेगा।

पूजा में अशुद्धि

किसी भी पूजा में शुद्धता का बहुत महत्व होता है। वट सावित्री व्रत के दौरान काले या नीले रंग के वस्त्र धारण न करें। इस दिन लाल, पीला या नारंगी जैसे शुभ रंग पहनना चाहिए। पूजा में बासी या अशुद्ध चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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