भोपाल में आज सीएम डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में 4000 मेगावॉट बिजली समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, 60 हजार करोड़ निवेश की उम्मीद

इस एग्रीमेंट से वर्ष 2030-31 तक अनुमानित 27,000 मेगावॉट की बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और मध्यप्रदेश को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।
CM Mohan Yadav

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भोपाल में आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 4000 मेगावॉट बिजली के पावर सप्लाई एग्रीमेंट (PSA) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी कि इससे प्रदेश में 60 हजार करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष निवेश होगा और लगभग आठ हज़ार लोगों को रोज़गार मिलने की संभावना है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य मध्यप्रदेश में अगले दशक तक बिजली की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि प्रदेश में वर्ष 2030-31 तक विद्युत की मांग लगभग 27,000 मेगावॉट तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में चार हजार मेगावॉट की बिजली क्षमता से राज्य की बढ़ती मांग की लगभग शत-प्रतिशत पूर्ति संभव हो सकेगी जिससे उद्योगों, कृषि और घरों को आवश्यक बिजली मिल सकेगी।

पावर सप्लाई एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होंगे

मध्यप्रदेश में बिजली उत्पादन और आपूर्ति को नई मजबूती मिलने वाली है। इस दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत 4000 मेगावॉट क्षमता वाली नई थर्मल पावर परियोजनाओं के लिए पावर सप्लाई एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। यह अनुबंध आज सीएम हाउस के समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में होगा। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी इस मौके पर उपस्थित रहेंगे।

ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की पहल

ये नई विद्युत परियोजनाएं अनूपपुर जिले में स्थापित की जाएंगी। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि इसका लाभ कई रूपों में देखा जाएगा। इससे न सिर्फ बिजली की उपलब्धता में वृद्धि होगी बल्कि प्रदेश में 60,000 करोड़ के निवेश की भी उम्मीद है जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही इन परियोजनाओं से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और लगभग 5,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। यह कदम मध्यप्रदेश को आने वाले वर्षों में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

इस तरह हुई बोली प्रक्रिया और कंपनियों का चयन

इस पूरी प्रक्रिया को एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) ने संचालित किया। कंपनी ने DBFOO मॉडल के तहत टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के माध्यम से 3200 मेगावॉट बिजली की खरीद के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं। इसमें ग्रीनशू विकल्प के तहत अतिरिक्त 800 मेगावॉट खरीद का प्रावधान भी शामिल था। बोली प्रक्रिया के बाद बिजली उत्पादन की क्षमता जिन्हें आवंटित की गई है उनमें हिन्दुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को 800 मेगावॉट, टोरेंट पावर लिमिटेड को 1600 मेगावॉट, अदानी पावर लिमिटेड को  800 मेगावॉट, ग्रीनशू विकल्प के अंतर्गत अतिरिक्त 800 मेगावॉट क्षमता भी शामिल है। इन सभी परियोजनाओं के लिए चयनित कंपनियों द्वारा गठित स्पेशल पर्पस व्हीकल के साथ बिजली आपूर्ति अनुबंध किए गए हैं। सरकार के अनुसार, इन समझौतों के तहत वर्ष 2030 से बिजली आपूर्ति शुरू होने की संभावना है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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