मध्यप्रदेश में मंगलवार से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के नाम भावनात्मक संदेश जारी करते हुए परीक्षा को जीवन की अंतिम कसौटी न मानने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ‘कॉपियाँ, किताबें, रिवीजन, टाइम टेबल इन सबके बीच मन में घबराहट होना स्वाभाविक है। लेकिन याद रखिए, परीक्षा जीवन की अंतिम कसौटी नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का एक साधारण पड़ाव है।’
पूर्व सीएम ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि किसी भी बच्चे की तुलना अन्य बच्चे से न करें। उन्होंने माता पिता से आग्रह किया कि अपने बच्चों का संबल बनें और उन्हें बताएं कि किसी भी तरह के परिणाम में वो उनके साथ हैं।
कमलनाथ ने बोर्ड एग्ज़ाम से पहले स्टूडेंट्स को दी समझाइश
दसवीं बोर्ड की परीक्षाएं स्टूडेंट्स के लिए एक अहम पड़ाव होती हैं। इस दौरान सिर्फ बच्चों को ही नहीं बल्कि माता पिता को भी धैर्य और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है। कमलनाथ ने विद्यार्थियों के नाम अपने संदेश में कहा कि “डर को दिल से बाहर निकाल दीजिए। आपने जितनी तैयारी की है, वही आपकी ताकत है। प्रश्नपत्र आपके आत्मविश्वास की परीक्षा ले सकता है, लेकिन आपके व्यक्तित्व की नहीं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि परिणाम सिर्फ उस समय की तैयारी को दर्शाते हैं, न कि किसी की संपूर्ण बुद्धिमत्ता या क्षमता को।
‘परीक्षाएं जीवन का एक पड़ाव हैं, मंजिल नहीं’
पूर्व सीएम ने कहा कि उन्होंने कहा कि परीक्षाएं जीवन का एक पड़ाव हैं, मंजिल नहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाते हुए कहा कि यदि परिणाम उम्मीद के अनुरूप न भी आएं तो उसे जीवन का अंत न समझें। असफलता को उन्होंने “अल्पविराम” बताते हुए कहा कि दोबारा प्रयास और बेहतर रणनीति से आगे बढ़ा जा सकता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि “एक बार चूक हो जाए, तो दोबारा मेहनत कीजिए, रणनीति बदलिए और फिर से चल पड़िए। जिस दिन आप फिर से प्रयास शुरू कर देंगे, उसी दिन मंजिल आपके करीब आने लगेगी।” साथ ही उन आशंकाओं पर भी टिप्पणी की जिनमें कहा जाता है कि एक वर्ष का नुकसान पूरे जीवन को प्रभावित कर देता है। उन्होंने कहा कि जीवन वर्षों से नहीं, सीख और अनुभवों से चलता है। यदि लक्ष्य स्पष्ट है तो थोड़ी देरी भी व्यक्ति को और मजबूत बना सकती है।
अभिभावकों से अपील
कमलनाथ ने माता-पिता से भी विशेष आग्रह किया है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उनकी तुलना दूसरों से न करें। उन्होंने कहा कि “हर बच्चा अलग है, उसकी गति और क्षमता अलग है। इन दिनों उन्हें अंकों से ज्यादा आपके भरोसे की जरूरत है”। उन्होंने अभिभावकों से घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रखने की अपील करते हुए कहा कि बच्चों को यह भरोसा दिलाएँ कि परिणाम चाहे जो भी हो, परिवार उनके साथ खड़ा है। अपने संदेश में उन्होंने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सफलता का रास्ता सीधा नहीं होता लेकिन मजबूत इरादा हर ठहराव को अवसर में बदल सकता है।





