कमलनाथ ने मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितैषी होने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों को पूरी तरह झुठला रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रदेश के किसानों के साथ जो हो रहा है वो सिर्फ अन्याय नहीं बल्कि उनके भरोसे के साथ धोखा है।
उन्होंने कहा कि गेहूं का एमएसपी 2625 रुपए प्रति क्विंटल तय है लेकिन प्रदेश की मंडियों में किसान अपनी फसल 2200 से 2400 प्रति क्विंटल में बेचने को मजबूर हैं। इसका मतलब ये है कि उनके साथ हर क्विंटल पर 400 तक की सीधी लूट हो रही है और सरकार खामोशी से तमाशा देख रही है। बता दें कि कांग्रेस लगातार एमएसपी, कर्ज सहित किसानों के अन्य मुद्दों पर सरकार को घेर रही है।
एमएसपी को लेकर कमलनाथ ने सरकार को घेरा
कमलनाथ ने प्रदेश सरकार पर किसानों के साथ अन्याय और धोखा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि सरकारी नियम साफ कहते हैं कि नीलामी एमएसपी से नीचे शुरू नहीं हो सकती, फिर भी मंडियों में 2200 से बोली लग रही है। व्यापारी फसल को “कमजोर” बताकर कीमतें गिरा देते हैं और मंडी प्रशासन आंखें मूंद लेता है। उन्होंने कहा कि यह कोई छोटी चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित खेल लगता है।
बीजेपी से किए सवाल
पूर्व सीएम ने कहा है कि सरकारी खरीद केंद्रों पर लंबी कतारें, भुगतान में देरी और जटिल प्रक्रियाओं के चलते किसान मजबूर होकर खुले बाजार का रुख करते हैं। वहां उन्हें एमएसपी से कम कीमत मिलती है जिससे वे या तो घाटे में फसल बेचने को मजबूर होते हैं या फसल खराब होने का जोखिम उठाते हैं। उन्होंने सवाल किया है कि अगर एमएसपी ज़मीन पर लागू ही नहीं हो रही तो सरकार के इन दावों का क्या अर्थ है? क्या सरकार को इस स्थिति की जानकारी नहीं है या इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। कमलनाथ ने सरकार को घेरते हुए पूछा है कि एमएसपी से कम कीमत पर खरीद करने वाले व्यापारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी या फिर हर साल किसानों को फिर से नुकसान उठाना पड़ेगा।






