रेलवे ने कमर कसी: भोपाल में 40 कोच आइसोलेशन वार्ड में तब्दील, इंदौर में 80 की तैयारी

रेलवे ने कमर कसी: भोपाल में 40 कोच आइसोलेशन वार्ड में तब्दील, इंदौर में 80 की तैयारी

इंदौर/भोपाल@आकाश धौलपुरे. कोरोना को लेकर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में मरीजों के इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड्स की जरूरत भी बढ़ रही है. इसी के मद्देजनर रेल विभाग लगातार रेल्वे कोचेज़ को आइसोलेशन वार्ड्स के लिए इस्तेमाल करने लायक बना रहा है.

भोपाल के निशातपुरा इलाके में स्थिति रेल्वे फैक्ट्री ने 40 रेल डिब्बों को आइसोलेशन वॉर्ड की शक्ल दे दी है. इन डिब्बों में ऑक्सीजन की उपलब्धता के साथ-साथ कई अन्य मेडिकल इक्यूपमेंट्स लगाने की सुविधाएं भी जुटाई गई हैं. एक कोच में 10 मरीजों को आइसोलेशन में रखा जा सकता है. साथ ही इनमें डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के रहने की भी सुविधा है.

पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक के निर्देशन में रतलाम मंडल के इंदौर में 50  थर्ड एसी और डॉ. अंबेडकर नगर, महू में 30 थर्ड एसी कोचज़ को आइसोलेशन वॉर्ड्स में परिवर्तित किया जा रहा है. कुल मिलाकर रेल्वे भी अब कोरोना के खिलाफ जंग में मैदान में उतर गया.

सरकार लगातार ये दावा कर रही है कि कोरोना के खिलाफ जंग में संसाधनों की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा. यही वजह की मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में इन रेलवे कोचेज़ में इलाज का पूरा इंतजाम किया गया है.

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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