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राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कांग्रेस का छोड़ा ये पद, बोले-युवाओं को दें मौका

Written by:Pooja Khodani
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राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कांग्रेस का छोड़ा ये पद, बोले-युवाओं को दें मौका

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)  के दिग्गज नेता और कांग्रेस राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा ने कांग्रेस के लीगल सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके लिए उन्होंने 25 जून को कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी (Congress National President Sonia Gandhi) को पत्र लिखा था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। इसकी जानकारी खुद विवेक तन्खा ने ट्वीट कर दी है। आपको बता दे कि विवेक तन्खा कांग्रेस के नाराज नेताओं के समूह जी-23 में शामिल थे

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राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा (Congress Rajya Sabha MP Vivek Tankha) ने ट्वीट कर लिखा है कि मैंने 5 साल तक  AICC कानूनी विभाग के अध्यक्ष (AICC Legal Department Chairman) के रूप में कार्य किया जो किसी भी पद के लिए एक लंबा कार्यकाल है। मैं कांग्रेस अध्यक्ष और सभी सहयोगियों को उस अद्भुत विश्वास सहयोग और तालमेल के लिए धन्यवाद देता हूं जिसका मैंने अनुभव किया।मेरा विचार है कि अब इस पद पर नए लोगों जिम्मेदारी मिलना चाहिए, इसलिए मैंने 25 जून को पत्र लिख इस पद से इस्तीफा (resignation) दे दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ( Supreme Court Senior Advocate) और विवेक तन्खा ने ट्वीट कर लिखा है कि मैं वास्तव में यह नहीं मानता कि कोई भी बहुत लंबे समय तक बने रहने से किसी पद के साथ न्याय कर सकता है। नए लोगों को अवसर मिलना चाहिए। मैंने जीवन भर इस सिद्धांत का पालन किया है। दुनिया में सिर्फ एक पद पर बने रहने के अलावा और भी बहुत कुछ है।

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विवेक तन्खा ने ट्वीट कर लिखा है कि मेरा धन्यवाद पत्र 25 जून को सीपी आईएनसी को कानूनी, मानव संसाधन और आरटीआई विभाग के अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया क्योंकि मैंने 5 साल का लंबा कार्यकाल किया था। नए लोगों को मौका मिलना चाहिए !! यह मेरे जीवन का विश्वास है। मैंने हमेशा इसकी वकालत की है और इसलिए इसका अभ्यास करना चाहिए।आपके गर्मजोशी भरे पत्र के लिए कांग्रेस अध्यक्ष का धन्यवाद। मुझे नई चुनौतियां लेना पसंद है। पब्लिक वेल मेरा आदर्श वाक्य है। सोने से पहले, सोने से पहले मीलों चलना है। हाथ जोड़कर प्रणाम

 

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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani
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