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टाइगर स्टेट में बाघों पर संकट! 34 दिन में 10 बाघों की मौत पर सियासी घमासान, उमंग सिंघार का सरकार पर असुरक्षित माहौल बनाने का आरोप

Written by:Shruty Kushwaha
Published:
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बाघ सिर्फ आंकड़े नहीं बल्कि प्रदेश की जैव विविधता और पहचान हैं और उनकी सुरक्षा में विफलता सरकार की गंभीर नाकामी को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि लापरवाह व्यवस्था, कमजोर निगरानी और दिखावटी दावों ने मध्यप्रदेश को बाघों के लिए असुरक्षित बना दिया है।
टाइगर स्टेट में बाघों पर संकट! 34 दिन में 10 बाघों की मौत पर सियासी घमासान, उमंग सिंघार का सरकार पर असुरक्षित माहौल बनाने का आरोप

Umang Singhar

टाइगर स्टेट के रूप में पहचाने जाने वाले मध्यप्रदेश में बाघ संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। साल 2026 की शुरुआत से अब तक 34 दिन में राज्य में दस बाघों की मौत हो चुकी है जिसे लेकर कांग्रेस प्रदेश सरकार पर हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि लापरवाह व्यवस्था, कमजोर निगरानी और दिखावटी दावों ने प्रदेश को बाघों के लिए असुरक्षित बना दिया है।

बता दें कि पिछले साल मध्यप्रदेश में लगभग 54 बाघों की मौतें दर्ज की गई थी..जो किसी एक वर्ष में अब तक का उच्चतम आंकड़ा है। वन्यजीव एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाघों की इतनी संख्या में मौत सिर्फ प्राकृतिक कारणों से नहीं हो सकती। इसके पीछे कमजोर निगरानी, अवैध जाल, करंट ट्रैप और स्थानीय समन्वय की कमी बड़े कारण हैं।

MP में बाघों की मौत के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस साल जनवरी में 7 बाघों की मौत दर्ज की गई थी, जबकि फरवरी की शुरुआत में दो और मौतों ने कुल आंकड़े को नौ तक पहुंचा दिया है। इनमें से कई मौतें अवैध बिजली जालों से हुईं जो किसान फसलों की सुरक्षा के नाम पर बिछाते हैं, लेकिन ये जाल अक्सर बाघों और अन्य वन्यजीवों के लिए घातक साबित हो रहे हैं। वहीं, बाघों के आपसी संघर्ष को भी एक वजह बताया जा रहा है। पिछले वर्ष मध्यप्रदेश में लगभग 54 बाघों की मौत हुई थी, जो प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद एक साल में सबसे अधिक संख्या है।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ‘प्रदेश में बाघ नहीं, सरकार की लापरवाही गिनती में है’। नेता प्रतिपर्ष ने कहा कि 34 दिनों में 10 बाघों की मौत वन्यजीव संरक्षण पर सरकार की गंभीर विफलता को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि ‘बाघ सिर्फ आंकड़े नहीं हमारी जैव विविधता और पहचान हैं। लापरवाह व्यवस्था, कमजोर निगरानी और दिखावटी दावों ने प्रदेश को बाघों के लिए असुरक्षित बना दिया है। संरक्षण भाषणों से नहीं, जवाबदेही और ठोस कार्यवाही से होता है।’ इस तरह कांग्रेस ने बाघों की मौत को लेकर प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।