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‘अब नहीं संभले तो बहुत देर हो जाएगी’ जंगलों को लेकर उमंग सिंघार ने जताई चिंता, WRI के आंकड़ों का हवाला दिया

Written by:Shruty Kushwaha
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दुनियाभर में हर साल 10 मिलियन हेक्टेयर जंगल नष्ट हो रहे हैं। जंगल हमारे ग्रह की रीढ़ हैं। वे ऑक्सीजन, जलवायु स्थिरता, जैव-विविधता, और आजीविका प्रदान करते हैं। उनके बिना, हम गंभीर पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना करेंगे। इसीलिए समय रहते जंगलों को बचाने के लिए गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है।
‘अब नहीं संभले तो बहुत देर हो जाएगी’ जंगलों को लेकर उमंग सिंघार ने जताई चिंता, WRI के आंकड़ों का हवाला दिया

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भारत और विश्वभर में जंगलों की कटाई और वनों को हो रहे नुकसान को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि अगर हमें अपनी धरती को साँस लेने लायक, जीने लायक बनाए रखना है तो हर हाल में अपने जंगलों को बचाना होगा। अगर हम अब भी नहीं संभले, तो बहुत देर हो जाएगी।

उन्होने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ये पोस्ट विश्व संसाधन संस्थान (WRI) और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच (Global Forest Watch) की ताज़ा रिपोर्ट के संदर्भ लिखी है..जो विश्वभर में जंगलों के नुकसान पर आंकड़े प्रस्तुत करती है।

उमंग सिंघार ने जंगलों को लेकर जताई चिंता

उमंग सिंघार ने लिखा है कि ‘विश्व संसाधन संस्थान के ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच और यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैरीलैंड के ताज़ा आंकड़े चौंकाने वाले हैं – 2024 में जहां भारत में पेड़ों की कटाई 6.9% घटी, वहीं प्राथमिक वनों का नुकसान 5.9% बढ़ गया। जंगल की आग एक बड़ा कारण रहा – 2023 में जहां 368 हेक्टेयर प्राथमिक वन जले थे, 2024 में यह बढ़कर 950 हेक्टेयर हो गया, यानी 158% की बढ़ोतरी। इस साल भारत में कुल 18,200 हेक्टेयर प्राथमिक वन नष्ट हुए।’ उन्होंने कहा कि हम अगर अपने जंगलों को नहीं बचाएंगे तो आने वाले समय में पूरी मानवता को बहुत बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा।

जंगल नहीं बचे तो हम भी नहीं बचेंगे

ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच के अनुसार, विश्व में हर साल लगभग 10 मिलियन हेक्टेयर जंगल नष्ट हो रहे हैं। 2024 में वैश्विक स्तर पर प्राथमिक वनों (प्राइमरी फॉरेस्ट) का नुकसान 3.7% बढ़ा, जिसमें जंगल की आग, अवैध कटाई और खनन प्रमुख कारण रहे। अमेजन, कांगो बेसिन, और दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगल सबसे अधिक प्रभावित हुए। भारत में स्थिति भी चिंताजनक है। 2024 में पेड़ों की कटाई में 6.9% की कमी आई, लेकिन प्राथमिक वनों का नुकसान 5.9% बढ़ गया। जंगल की आग इसकी प्रमुख वजह रही।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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