Veer Bal Diwas : सीएम डॉ मोहन यादव की बड़ी घोषणा,गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों की वीरता को स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ाया जायेगा

वीर बाल दिवस पर गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों अजीत सिंह जी, साहिबजादा जुझार सिंह जी, साहिबजादा जोरावर सिंह जी एवं साहिबजादा फतेह सिंह जी के शौर्य को याद किया जाता है
Veer Bal Diwas 2024 CM Dr. Mohan Yadav

Veer Bal Diwas: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज वीर बाल दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल स्थित गुरुद्वारे पहुंचकर मत्था टेका। सीएम ने गुरु गोविंद सिंह को याद किया, उनकी शहादत को नमन किया, मुख्यमंत्री ने गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों की वीरता और शौर्य को याद करते हुए एक बड़ी घोषणा की, उन्होंने कहा प्रदेश में अब गुरु गोविंद सिंह जी के चार साबिहजादों की वीरता को स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा।

सीएम डॉ मोहन यादव राजधानी में हमीदिया रोड स्थित गुरुद्वारे पहुंचे उन्होंने वहां मत्था टेका, गुरुवाणी का पाठ सुना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चारों साहिबजादों की शहादत पर वीर बाल दिवस के रूप में मनाने के लिए धन्यवाद देते हुए डॉ मोहन यादव ने कहा कि सिख समाज ने भारत की आजादी के लिए जो बलिदान दिया उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

चारों साहिबजादों की शहादत एमपी के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होगी 

मुख्यमंत्री ने कहा हमने गुरु गोविंद सिंह के शौर्य और वीरता की गाथा को स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ाने का फैसला पहले ही किया है अब हम उनके चारों साहिबजादों की शहादत को भी स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करेंगे, जिससे नई पीढ़ी मानवता और धर्म के प्रति उनके समर्पण भाव को समझ सके।

2022 से 26 दिसंबर को मनाया जा रहा वीर बाल दिवस  

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 2022 में गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों की शहादत को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की थी तभी से पूरा देश आज 26 दिसंबर के दिन को इस रूप में मनाता आ रहा है। इस दिन गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों अजीत सिंह जी, साहिबजादा जुझार सिंह जी, साहिबजादा जोरावर सिंह जी एवं साहिबजादा फतेह सिंह जी के शौर्य को याद किया जाता है इन चारों भाइयों ने मानवता और धर्म की रक्षा के लिए 26 दिसंबर 1705 में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।

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Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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