भर्तियों को लेकर आंदोलन की राह पर युवा बेरोजगार, 4 सितम्बर को भोपाल में जुटेंगे

भर्तियों को लेकर आंदोलन की राह पर युवा बेरोजगार, 4 सितम्बर को भोपाल में जुटेंगे

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट
मध्य प्रदेश के युवा पुलिस भर्ती, एमपीपीएससी और अन्य स्टेट गवर्नमेंट की वैकेंसी नहीं निकलने से हताश हैं| सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहे युवाओं का सब्र अब टूट रहा है| प्रदेश भर के युवा बेरोजगारों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है| 4 सितंबर को प्रदेश भर के युवा भोपाल में जुटेंगे|

भर्तियों के इन्तजार में बैठे युवाओं का कहना है कि एमपी पुलिस एमपीएसआई और MPPSC और अन्य स्टेट गवर्नमेंट की वैकेंसी पिछले 3 साल से नहीं आई है| मध्य प्रदेश बेरोजगार युवा संघ के बैनर तले प्रदेश भर के हजारों युवा अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करेंगे| जो भोपाल में 4 सितंबर को होगा| इस आंदोलन में प्रदेश के कोने-कोने से एमपी के युवा युवतियां भाग लेने आ रहे हैं|

सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं ने आंदोलन की शुरुआत कर दी है| वहीं अलग-अलग जिलों में इसको लेकर जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिए जा रहे हैं| छात्रों का कहना है कि पिछले 3 साल में कितने ही युवाओं ने बेरोजगारी के कारण आत्महत्या कर ली है| सरकार ने पिछले 3 वर्षों से कोई भी भर्ती नहीं निकाली है| युवाओं की मांग है कि पुलिस भर्ती में शामिल होने की अधिकतम आयु बढ़ाकर 37 वर्ष की जाए क्योंकि, समय पर भर्ती निकलने से युवा लगातार ओवरएज हो रहे हैं। कांस्टेबल के लिए 15 हजार और सब इंस्पेक्टर के 1500 पद के साथ भर्ती निकाली जाए। भर्ती परीक्षा ऑनलाइन माध्यम से पीईबी द्वारा कराई जाए| मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती को लेकर युवा काफी समय से संघर्ष कर रहे हैं। पिछले 3 सालों में पुलिस विभाग में भर्तियां नहीं निकली। पुलिस की नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं की उम्र वैकेंसी के इंतजार में बढ़ती रही है।

दिग्विजय सिंह को सौंपा ज्ञापन
बुधवार को जबलपुर में 30 से 35 युवाओं ने राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह और पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोट को अपनी समस्या से अवगत कराया और उनसे आग्रह किया कि हम बेरोजगारों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाएं और हमारे भोपाल में होने वाले 4 सितंबर को महा आंदोलन में आप सब सहयोगी बने|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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